यामीन विकट
ठाकुरद्वारा : असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक विजयदशमी (दशहरा ) का पर्व नगर व ग्रामीण क्षेत्र में परंपरागत तरीके से मनाया गया । सत्य के प्रतीक भगवान श्री राम ने असत्य का प्रतीक अहंकारी रावण के मेला स्थल में लगे पुतले मे अग्निबाण तीर छोड़ते ही रावण का पुतला धू धू कर जलने लगा।
मंगलवार को दशहरा के अवसर पर घरों में परिवार सहित विधि विधान से दशहरा का पूजन किया गया। परंपरानुसार बहिनों ने भाइयों के कानों पर नौरते रखे तथा भाईयों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहिनों को भेंट स्वरूप उपहार दिए और उन्हें दशहरे की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर हिंदुओं के घरों में परंपरानुसार विधि विधान से शस्त्रों की भी पूजा की गई । रामलीला मैदान से विधिवत तरीके से एक तरफ भगवान श्री राम की सेवा तो दूसरी ओर लंका आदि पति राज राजा रावण की सेना ढोल नगाड़ों व गाजे बाजे के साथ कमलापुरी रोड स्थित दशहरा मेला स्थान पर पहुंचे । दशहरा मेले के दौरान भगवान श्री राम ब लंका के राजा रावण के बीच की सेनो में कई घंन्टे युद्ध का मनचंदा दर्शाया गया । शाम 6 बजे के करीब भगवान श्री राम ने मेला मैदान में लगे रावण के पुतले को अग्नि बाण छोड़कर आग के हवाले कर दिया रावण के पुतला तेज पटाखे की आवाज के साथ धू धू कर जल उठा । मेला स्थल में यह दृश्य देख वँहा उपस्थित लोगों ने भगवान श्री राम की जय जयकारे लगाए।
मेला स्थल में नगर व ग्रामीण क्षेत्र के हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने विभिन्न तरह के झूलों सहित फल , खेल ,खिलौने ,मिठाई आदि की तमाम दुकानो पर पहुंच कर खरीदारी की। वही मिट्टी के बर्तनों की भी भारी बिक्री हुई। मेले मेंअधिक भीड़ के कारण ही मेला मार्ग पर पुलिस को कई स्थानों पर रूट डायवर्जन करना पडा।
कमाल पुरी रोड पर मेला लगने के कारण आने जाने वाले वाहनों को परेशानी उठानी पड़ी।दिन ढलते ही रामलीला मैदान में बुराई के प्रतीक रावण व मेघनाथ के पुतलों का दहन कर अंत कर दिया गया ।