कानपुर CMO दफ्तर में दो-दो CMO पहुंचे काम पर, हुआ जबरदस्त टकराव, पहुंची पुलिस और अफसर
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा ऐसा प्रशासनिक ड्रामा देखने को मिला जिसने पूरे शहर में हलचल मचा दी। कानपुर के CMO ऑफिस में एक साथ दो CMO काम पर पहुंच गए, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी फैल गई। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंच गए, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
पूरा मामला कानपुर के CMO डॉ. हरिदत्त नेमी और जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। जून 2025 में डॉ. नेमी को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उनके निलंबन पर रोक लगा दी। कोर्ट के आदेश के बाद डॉ. नेमी ने बुधवार सुबह सीएमओ कार्यालय पहुंचकर दोबारा कार्यभार संभालने की कोशिश की। लेकिन इसी समय, शासन द्वारा नियुक्त किए गए नए CMO ने भी ऑफिस पहुंचकर कामकाज संभाल लिया था।
एक ही समय में दो CMO ऑफिस में होने के कारण पूरे कार्यालय में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। स्टाफ भी दो भागों में बंट गया— कुछ लोग डॉ. नेमी के समर्थन में थे, जबकि बाकी लोग वर्तमान CMO के साथ खड़े थे। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई और मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को दखल देना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह और भाजपा के कुछ नेताओं के बीच भी इस मामले में मतभेद चल रहे हैं। कुछ भाजपा विधायक Dr. Nemi के समर्थन में हैं, जबकि अन्य अधिकारी DM के साथ खड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब न सिर्फ प्रशासनिक विवाद बन चुका है, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, शासन स्तर पर यह तय किया जा रहा है कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक किसे कार्यभार दिया जाए। वहीं, डॉ. नेमी का कहना है कि जब हाईकोर्ट ने निलंबन पर रोक लगा दी है, तो उन्हें काम से रोका नहीं जा सकता।
कानपुर जैसे बड़े शहर में स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष पद पर ऐसा असमंजस और टकराव न केवल आम जनता के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इससे पूरे विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। अब देखना होगा कि शासन इस विवाद को किस तरह से हल करता है और क्या डॉ. नेमी को पुनः पद पर बहाल किया जाएगा या किसी नए CMO को कार्यभार सौंपा जाएगा।