लालकुआं की सड़कों पर ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ ड्रामा: वन विभाग की टीम को देख तस्कर ने दौड़ाया ट्रैक्टर, शांतिपुरी बैरियर पर ‘अर्जुन’ का पहिया जाम!
लालकुआं (मुकेश कुमार): तराई की सर्द रात में जब दुनिया चैन की नींद सोने की तैयारी कर रही थी, तब किच्छा-लालकुआं नेशनल हाईवे पर वन विभाग और लकड़ी तस्करों के बीच किसी थ्रिलर फिल्म जैसा हाई-वोल्टेज ड्रामा चल रहा था। सोमवार रात करीब 8:30 बजे, डौली रेंज की सतर्क टीम जब शांतिपुरी राजस्व क्षेत्र में गश्त कर रही थी, तभी उनकी नजर एक महिंद्रा ट्रैक्टर अर्जुन 555 DI (UK06N7789) पर पड़ी।
वन कर्मियों को देखते ही तस्कर के माथे पर पसीना आ गया और उसने ट्रैक्टर को जांच के लिए रोकने के बजाय उसे एक रेसिंग कार की तरह किच्छा की ओर भगा दिया। हाईवे पर शुरू हुई इस लुका-छिपी ने गश्त कर रही टीम को भी हैरान कर दिया। वन विभाग की टीम ने तत्काल अपनी गाड़ी दौड़ाई और तस्कर का पीछा करना शुरू किया। खुद को वन विभाग के ‘शिकंजे’ में फंसता देख और विभाग की सख्ती को भांपते हुए शातिर तस्कर ने शांतिपुरी वन बैरियर के पास ट्रैक्टर को लावारिस छोड़ने में ही अपनी भलाई समझी और अंधेरे का फायदा उठाकर आंखों से ओझल हो गया।
जब विभाग की टीम ने लावारिस खड़े उस ट्रैक्टर-ट्रॉली की बारीकी से तलाशी ली, तो पूरा माजरा आईने की तरह साफ हो गया। ट्रैक्टर की ट्रॉली ‘गुटेल प्रकाष्ठ’ (सोक्ता) की अवैध लकड़ियों से लबालब भरी हुई थी। टीम ने जब परिवहन से संबंधित कागजात और परमिट खंगालने की कोशिश की, तो वहां नियमों की धज्जियां उड़ती मिलीं—न कोई वैध प्रपत्र था और न ही तस्करी का कोई कानूनी आधार। तस्करों की यह गुस्ताखी वन विभाग की मुस्तैदी के आगे धरी की धरी रह गई।
फिलहाल, वन विभाग ने तस्करी में प्रयुक्त इस ‘अर्जुन’ को बंधक बनाकर डौली वन परिसर लालकुआं में खड़ा कर दिया है। विभाग अब फरार चालक और वाहन स्वामी की कुंडली खंगालने में जुटा है, ताकि इस अवैध कारोबार की जड़ों तक पहुंचा जा सके। वन अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जंगलों के खजाने पर डाका डालने वालों का हश्र यही होगा और आने वाले दिनों में यह विधिक कार्रवाई और भी अधिक ‘रगड़ाई’ भरी होने वाली है।
