पूर्व CM हरीश रावत के AI वीडियो पर पुलिस का बड़ा एक्शन; FIR दर्ज, आईटी एक्ट की धाराओं में फंसा पेंच
देहरादून: उत्तराखंड की सियासत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को लेकर मचे बवाल के बीच पुलिस ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक कथित ‘AI जनरेटेड फर्जी वीडियो’ के सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में देहरादून पुलिस ने आधिकारिक रूप से FIR दर्ज कर ली है।
कानूनी शिकंजे में साजिशकर्ता
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा दी गई लिखित तहरीर के बाद हरकत में आई पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IT एक्ट की धारा 66D और BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 196 व 353 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई है जिन्होंने तकनीक का सहारा लेकर जनभावनाओं को भड़काने और एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व की छवि धूमिल करने का प्रयास किया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया गया था, जिसे हरीश रावत ने पूरी तरह ‘फर्जी’ और ‘AI तकनीक द्वारा निर्मित’ बताया था। रावत का आरोप है कि विरोधियों द्वारा उनकी आवाज और चेहरे का गलत इस्तेमाल कर जनता के बीच भ्रम फैलाने की साजिश रची गई है।
AI तकनीक: राजनीति के लिए नई चुनौती
इस FIR के बाद राज्य में यह चर्चा तेज हो गई है कि चुनाव और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में AI (Deepfake) का इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से उन डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच कर रही है, जहाँ से यह वीडियो सबसे पहले ओरिजिनेट (प्रसारित) हुआ था।
“लोकतंत्र में तकनीक का इस्तेमाल विकास के लिए होना चाहिए, न कि किसी के चरित्र हनन के लिए। पुलिस इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को बेनकाब करेगी।” — (सूत्र, पुलिस विभाग)