काशीपुर के जगतपुर पट्टी टोल पर ‘अंधेरगर्दी’: ओवरलोडिंग का ‘ओपन ऑफर’ और ‘अननोन’ चेहरों का पहरा; क्या मैनेजर की शह पर फल-फूल रहा है अवैध वसूली का खेल?
अज़हर मलिक
काशीपुर (उधम सिंह नगर): उत्तराखंड के प्रवेश द्वार काशीपुर में स्थित जगतपुर पट्टी टोल प्लाजा इन दिनों भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का ‘जंक्शन’ बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश के दावों को ठेंगा दिखाते हुए इस टोल पर नियमों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं।
आरोप है कि टोल मैनेजर की मिलीभगत से यहाँ खनन माफियाओं और ओवरलोड वाहनों को ‘स्पेशल वीआईपी ट्रीटमेंट’ दिया जा रहा है। नेशनल हाईवे पर अपनी क्षमता से कहीं अधिक वजन और ऊंचाई (Overheight) तक खनन सामग्री लादे डंपर मौत बनकर दौड़ रहे हैं, लेकिन टोल के कांटे (Weigh-in-Motion) उनके सामने बौने साबित हो रहे हैं। मजे की बात यह है कि इन ओवरलोड वाहनों से जुर्माना वसूलने के बजाय, इन्हें आपसी साठगांठ से गुपचुप तरीके से पास कराया जा रहा है।
टोल पर चल रहा यह ‘खेल’ यहीं खत्म नहीं होता। सूत्रों की मानें तो डंपर स्वामियों की निजी कारों को ‘मुफ्त’ निकालने का एक अलग ही सिंडिकेट यहाँ सक्रिय है।
चौंकाने वाली बात यह है कि टोल प्लाजा पर वर्दीधारी कर्मचारियों से ज्यादा ‘अननोन पर्सन’ (अज्ञात लोग) नजर आते हैं। बिना किसी आईडी कार्ड या पहचान के ये संदिग्ध लोग कौन हैं और किसके आदेश पर टोल की कमान संभाल रहे हैं, यह अपने आप में एक बड़ा रहस्य है। क्या ये वही लोग हैं जो ‘मैनेजर के खास’ बनकर अवैध वसूली और दबंगई के दम पर सिस्टम को मैनेज करते हैं? जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। अब सवाल यह उठता है कि NHAI के आला अधिकारी और जिला प्रशासन इस खुली लूट पर अपनी आंखें कब खोलेंगे? जनता अब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और जगतपुर पट्टी टोल के लाइसेंस पर तत्काल कड़े एक्शन की मांग कर रही है।