महा-खुलासा: आमपोखरा रेंज में रेंजर खानायत का ‘कब्रिस्तान’, अब मिली तीसरी लाश!

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महा-खुलासा: आमपोखरा रेंज में रेंजर खानायत का ‘कब्रिस्तान’, अब मिली तीसरी लाश!

रक्षक ही बना भक्षक? रेंजर पूरन सिंह खानायत की ‘सल्तनत’ में बेजुबानों का नरसंहार जारी

अज़हर मलिक 

रामनगर (The Great News): तराई पश्चिमी डिवीजन की आमपोखरा रेंज अब पर्यटकों के लिए सफारी का केंद्र नहीं, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों की ‘सामूहिक कब्रगाह’ बन चुकी है। ‘The Great News’ की टीम ने रेंजर पूरन सिंह खानायत के उस काले सच से पर्दा उठा दिया है जिसे वो अपनी रसूखदार कुर्सी के नीचे दबाने की कोशिश कर रहे थे। दो कब्रों के सनसनीखेज खुलासे के बाद अब तीसरी चित्तल की गुप्त कब्र मिलने से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

तीसरी कब्र: रेंजर के ‘पापलोक’ का एक और सबूत

​नियमों को ताक पर रखकर बिना पोस्टमार्टम के चित्तलों को दफनाने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तीसरी कब्र का मिलना यह साबित करता है कि आमपोखरा रेंज में वन्यजीवों की संदिग्ध मौतें ‘सामान्य’ नहीं हैं।

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  • ​क्या रेंजर साहब किसी बड़े शिकारी गिरोह को संरक्षण दे रहे हैं?
  • ​या फिर रेंज में कोई घातक बीमारी फैली है जिसे छुपाकर रेंजर साहब अपनी नाकामियों पर पर्दा डाल रहे हैं?

रेंजर खानायत: नियम जूतों की नोक पर, तानाशाही चरम पर

​वन्यजीव अधिनियम की श्रेणी-2 में आने वाले चित्तल की मौत पर पोस्टमार्टम अनिवार्य है, लेकिन रेंजर पूरन सिंह खानायत के लिए शायद खुद के बनाए ‘तुगलकी कानून’ सर्वोपरि हैं। साक्ष्यों को मिट्टी में मिला देना अपराध की श्रेणी में आता है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि आनन-फानन में इन बेजुबानों को बिना डॉक्टर की जांच के जमीन में दफन कर दिया गया?

बड़ा सवाल: क्या रेंजर खानायत को वन्यजीवों की जान से ज्यादा अपनी कुर्सी और साख बचाने की चिंता है?

 

कुर्सी का मोह और अधिकारियों की ‘कुंभकर्णी’ नींद

​सालों से एक ही रेंज पर कुंडली मारकर बैठे रेंजर साहब ने आमपोखरा को अपनी ‘निजी जागीर’ समझ लिया है। कर्मचारी खौफ में हैं और अधिकारी मौन।

  1. साजिश की बू: बिना उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा ‘डेथ जोन’ नहीं चल सकता।
  2. पर्यटन पर चोट: देश-विदेश से सैलानी यहाँ वन्यजीवों को देखने आते हैं, न कि रेंजर द्वारा बनाए गए ‘कब्रिस्तानों’ को देखने।
  3. निष्पक्ष जांच की मांग: जब तक पूरन सिंह खानायत इस कुर्सी पर विराजमान हैं, तब तक निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है। इन्हें तत्काल प्रभाव से हटाना अनिवार्य है।

‘The Great News’ की चेतावनी: अभी तो कई राज दफन हैं!

​दो कब्रों के बाद तीसरी कब्र का मिलना तो सिर्फ ट्रेलर है। रेंजर साहब की ‘सल्तनत’ के नीचे और कितने बेजुबानों का खून दबा है, ‘The Great News’ का कैमरा हर उस परत को उखाड़ फेंकेगा। हम वन्यजीवों के इस ‘नरसंहार’ पर तब तक खामोश नहीं बैठेंगे जब तक दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेज दिया जाता।

“साहब, मिट्टी लाशों पर डाली जा सकती है, उनके लहू की चीखों पर नहीं। हिसाब तो होकर रहेगा!”

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