देहरादून: उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लौ अब एक प्रचंड मशाल बन चुकी है। आज राजधानी देहरादून की सड़कों पर गुस्से, गम और इंसाफ की एक ऐसी लहर देखी गई, जिसने सत्ता के गलियारों को खामोश कर दिया। अंकिता के हत्यारों को कड़ी सजा और मामले की CBI जांच की मांग को लेकर आज हजारों लोगों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया।
इस महारैली की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई जब समाज के हाशिए पर रहने वाले किन्नर समाज ने भी इस लड़ाई में अपना समर्थन दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जिसकी रूह इस हत्याकांड से कांप उठी थी।
— ओशिन सरकार (ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट)
रैली में आए लोगों की आंखों में आंसू और जुबान पर सिर्फ एक ही नाम था— अंकिता। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इस मामले की जांच की कमान सीबीआई के हाथों में नहीं सौंपी जाती, तब तक देवभूमि का यह आंदोलन थमेगा नहीं। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या आज की बेटियां अपने ही घर और प्रदेश में सुरक्षित नहीं हैं?
- राजधानी में भारी जनसैलाब के साथ मुख्यमंत्री आवास कूच।
- किन्नर समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं का जोरदार समर्थन।
- सरकार के खिलाफ नारेबाजी और CBI जांच की अटूट मांग।
- ओशिन सरकार का तीखा हमला— “बेटियों को बचाने में नाकाम रही सरकार।”
यह रैली इस बात का प्रमाण है कि अंकिता के लिए न्याय की यह मांग अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान की लड़ाई बन गई है।