भ्रष्ट सिस्टम बेनकाब: कार्रवाई नहीं, “कार्रवाई रोककर डिप्टी सीएमओ डॉ लईक का संरक्षण? डिप्टी CMO की मेहरबानी से मैक्सालाइफ ने सबूतों को मिटाने काम किया शुरू” इशारा: सांठगांठ या षडयंत्र, ISWA कनेक्शन से खुली अंदरूनी साठगांठ!!

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भ्रष्ट सिस्टम बेनकाब: कार्रवाई नहीं, “कार्रवाई रोककर डिप्टी सीएमओ डॉ लईक का संरक्षण? डिप्टी CMO की मेहरबानी से मैक्सालाइफ ने सबूतों को मिटाने काम किया शुरू” इशारा: सांठगांठ या षडयंत्र, ISWA कनेक्शन से खुली अंदरूनी साठगांठ!!

शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश 

बरेली: मैक्सालाइफ सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कथित ‘दोहरी पहचान’ और नियम उल्लंघन मामले में अब एक और गंभीर खुलासा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, डिप्टी सीएमओ स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी द्वारा समय रहते कोई ठोस कार्रवाई न करते हुए अस्पताल प्रबंधन को इतना समय दे दिया गया कि अब अस्पताल पर लगे आरोपों के निशान मिटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि जिस समय अस्पताल के खिलाफ तत्काल निरीक्षण, सीलिंग जैसी कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसी दौरान विभागीय चुप्पी बनी रही। इसी ढील का फायदा उठाकर अस्पताल प्रबंधन ने न सिर्फ बोर्ड बदलने का काम किया है, बल्कि रिकॉर्ड, साइनबोर्ड और आंतरिक दस्तावेजों में भी बदलाव शुरू कर दिया, जिससे जांच के दौरान वास्तविक स्थिति सामने आना मुश्किल हो सकता है।

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स्वास्थ्य विभाग की यह कथित उदारता अब सीधे तौर पर जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली मानी जा रही है।

 

 

 

जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो दो नामों से संचालन, मरीजों को भ्रमित करने और दस्तावेजी अनियमितताओं के पुख्ता प्रमाण सुरक्षित किए जा सकते थे। लेकिन देरी ने अस्पताल को अपने बचाव की तैयारी करने और तथ्यों को छुपाने का अवसर दे दिया।

 

 

इस पूरे घटनाक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद की भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। चर्चाएं हैं कि मैक्सालाइफ से जुड़े डॉक्टर अनीस बेग की कथित नजदीकी के चलते ही कार्रवाई को जानबूझकर धीमा रखा गया, जिससे अस्पताल प्रबंधन को ‘सेफ टाइम’ मिल गया।

 

 

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी को बचाने की रणनीति? यदि निष्पक्ष जांच हुई तो यह भी सामने आ सकता है कि किस स्तर पर निर्णय को रोका गया और किसके इशारे पर कार्रवाई टाली गई।

 

 

फिलहाल अब देरी से हुई संभावित सबूतों की छेड़छाड़ की भी अलग से जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी रसूख के दम पर कानून से खेलने की हिम्मत न कर सके।

 

 

इतना ही नहीं, सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि डॉ. अनीस बेग की ही सिफारिश पर डॉ. लईक अहमद को इस्वा (ISWA) एसोसिएशन में कोषाध्यक्ष बनाया गया था। इसी कथित करीबी संबंध को अब पूरे प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे हितों के टकराव और संभावित सांठगांठ की आशंका और मजबूत हो जाती है।

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