मौत के साये में प्रकृति की रक्षा करते जांबाज वनकर्मी; गणतंत्र दिवस पर तराई पश्चिमी डिवीजन ने दी शूरवीरों को सलामी

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मौत के साये में प्रकृति की रक्षा करते जांबाज वनकर्मी; गणतंत्र दिवस पर तराई पश्चिमी डिवीजन ने दी शूरवीरों को सलामी

रामनगर: तराई पश्चिमी वन प्रभाग में 77वाँ गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों के अदम्य साहस को नमन करने का दिन बना, जो हर पल मौत के साये में रहकर हमारे जंगलों की रक्षा करते हैं।

 

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घने जंगलों की वो डरावनी खामोशी, जहाँ अगले ही कदम पर किसी आदमखोर बाघ की दहाड़ या झाड़ियों के पीछे घात लगाए तेंदुए का जानलेवा हमला हो सकता है, उस खौफ के बीच ये वनकर्मी निहत्थे अपनी ड्यूटी को अंजाम देते हैं। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) प्रकाश चंद्र आर्य और उप्रभागीय वनाधिकारी संदीप गिरी ने उन वनकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया, जो कड़कड़ाती ठंड, मूसलाधार बारिश और खूंखार वन्यजीवों के बीच अपनी जान हथेली पर रखकर वनों की पहरेदारी करते हैं।

 

 

 

समारोह के दौरान भावुक होते हुए अधिकारियों ने वनकर्मियों के उस ‘अदृश्य दर्द’ को साझा किया, जिसमें एक फॉरेस्ट गार्ड रात के अंधेरे में केवल एक टॉर्च और डंडे के भरोसे उस जंगल में गश्त करता है, जहाँ कब कौन सा शिकारी जानवर हमला कर दे, कोई नहीं जानता। अतिक्रमण हटाओ अभियान की चुनौतियों से लेकर वन्यजीव संरक्षण के जोखिमों तक, इन कर्मियों ने हर मोर्चे पर विभाग का मान बढ़ाया है। प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि आज इन्हीं के संघर्षों का प्रतिफल है कि ‘फांटो इको टूरिज्म ज़ोन’ जैसी सफलताएं हमें मिल रही हैं, जहाँ पर्यटकों की संख्या दो हजार से बढ़कर एक लाख पहुँचने वाली है। गणतंत्र दिवस के इस मंच से संदेश दिया गया कि पर्यटन की इस चमक-धमक के पीछे उन वन प्रहरियों का पसीना और जोखिम भरा संघर्ष है, जो हर दिन मौत को मात देकर प्रकृति की इस विरासत को सहेज रहे हैं।

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