लालकुआं रेलवे स्टेशन: अमृत भारत योजना या भ्रष्टाचार का ‘अमृत’? घटिया निर्माण और बाल मजदूरी के आरोपों से हड़कंप
मुकेश कुमार
लालकुआं: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत लालकुआं रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का जो सपना दिखाया गया था, वह अब विवादों के घेरे में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस योजना की आधारशिला रखे जाने के बाद यहाँ सौंदर्यीकरण का काम तो शुरू हुआ, लेकिन विकास की इस चमकदार तस्वीर के पीछे भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही की स्याह परतें नजर आने लगी हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों ने करोड़ों की इस योजना की पारदर्शिता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्य में गुणवत्ता को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों का दावा है कि निर्माण में बेहद घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आधुनिकता की दुहाई देने वाली इस सरकारी योजना के तहत पुराने और जर्जर मलबे व पुरानी निर्माण सामग्री को ही दोबारा खपाया जा रहा है। ऐसे में करोड़ों के बजट वाली इस योजना की मजबूती और भविष्य में होने वाली सुरक्षा को लेकर गहरा संदेह पैदा हो गया है।
भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बीच एक और काला सच सामने आया है—निर्माण स्थल पर खुलेआम हो रही बाल मजदूरी। श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए बच्चों से काम कराना न केवल एक अपराध है, बल्कि यह सरकारी दावों और रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा बट्टा लगा रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस गैर-कानूनी कार्य पर किसी की नजर नहीं है?
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने अब इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार पारदर्शिता और विकास का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ लालकुआं में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। यदि समय रहते रेलवे प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने इन गंभीर शिकायतों पर संज्ञान नहीं लिया, तो आने वाले समय में यह मामला एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करता है या फाइलों में सब कुछ ‘अमृत’ बना रहता है।




