काशीपुर-जसपुर हाईवे टोल पर भ्रष्टाचार का बोलबाला वाहन स्वामियों और टोल प्रबंधन की मिलीभगत से राजस्व की खुली लूट, सरकारी पर्ची के बजाय ‘निजी टोकन’ के खेल से नियमों की उड़ी धज्जियां
अज़हर मलिक
काशीपुर और जसपुर के बीच स्थित नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार का एक बड़ा सिंडिकेट चलाया जा रहा है, जहाँ टोल प्रबंधन और रसूखदार वाहन स्वामियों के बीच की साठगांठ ने सड़क सुरक्षा और सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई है। नेशनल हाईवे पर क्षमता से कहीं अधिक वजन और ऊंचाई तक सामग्री लादे ओवरलोड वाहन बेखौफ होकर दौड़ रहे हैं,
लेकिन टोल पर लगे वजन करने वाले कांटे इन वाहनों के आगे पूरी तरह नाकाम और बौने साबित हो रहे हैं। इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इन ओवरलोड वाहनों से कानूनी जुर्माना वसूलने के बजाय, आपसी साठगांठ से उन्हें गुपचुप तरीके से पास कराया जा रहा है।
सरकारी टैक्स की रसीद काटने के बजाय वाहन स्वामियों को एक ‘निजी पर्ची’ थमा दी जाती है, जिसका शुल्क आधिकारिक टोल दर से कम होता है और यह पैसा सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। इतना ही नहीं, इस टोल पर चल रहे ‘वीआईपी कल्चर’ का आलम यह है कि डंपर स्वामियों की निजी कारों को बिना किसी शुल्क के मुफ्त में निकालने के लिए एक अलग सिंडिकेट सक्रिय है। अपनी जेबें भरने के चक्कर में टोल कर्मी और वाहन स्वामी न केवल सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि ओवरलोड वाहनों को बढ़ावा देकर आम राहगीरों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं, जिससे यह टोल प्लाजा अब सुविधा के बजाय अवैध वसूली और अव्यवस्था का केंद्र बन गया है।