“125 कैंट विधानसभा में कंबल की आड़ में चुनावी सियासत! डॉ अनीस बेग के ‘सॉफ्ट कैंपेन’ पर उठे गंभीर सवाल”, सेवा नहीं, सियासत के कंबल!

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“125 कैंट विधानसभा में कंबल की आड़ में चुनावी सियासत! डॉ अनीस बेग के ‘सॉफ्ट कैंपेन’ पर उठे गंभीर सवाल”, सेवा नहीं, सियासत के कंबल!

शानू कुमार ब्यूरो उत्तर

बरेली की 125 कैंट विधानसभा सीट पर इन दिनों कंबल वितरण की आड़ में सियासत गरम होती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी से जुड़े डॉ अनीस बेग लगातार एक ही विधानसभा क्षेत्र में कंबल वितरण के कार्यक्रम कर रहे हैं। रविवार को माधोबाड़ी में हुआ ताज़ा आयोजन इस सिलसिले की अगली कड़ी माना जा रहा है।

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स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह गतिविधि समाजसेवा से ज्यादा चुनावी जमीन तैयार करने की कोशिश प्रतीत होती है। हैरानी की बात यह है कि चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है, इसके बावजूद बार-बार सार्वजनिक कार्यक्रम, फोटो सेशन और भीड़ जुटाने की कवायद तेज हो गई है।

 

 

 

आरोप यह भी लग रहे हैं कि 125 कैंट विधानसभा में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, सड़कें, गंदगी, पेयजल संकट और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन इन पर ठोस पहल की बजाय कंबल वितरण जैसे भावनात्मक आयोजनों को प्राथमिकता दी जा रही है।

कुछ स्थानीय निवासियों का कहना है कि गरीबों की मजबूरी को राजनीतिक सहानुभूति में बदलने की यह रणनीति नई नहीं है। ठंड के मौसम में कंबल बांटना भले ही दिखने में मदद लगे, लेकिन जब यही काम बार-बार, एक सीमित क्षेत्र में और तय समय-सारिणी के साथ हो, तो इसके पीछे के राजनीतिक इरादों पर सवाल उठना लाज़िमी है।

 

 

 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस तरह के कार्यक्रमों को सीधे आचार संहिता का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता, लेकिन इन्हें प्री-इलेक्शन सॉफ्ट कैंपेन माना जाता है—जहां सेवा के नाम पर पहचान बनाई जाती है और वोट बैंक साधा जाता है।

 

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डॉ अनीस बेग वास्तव में जनहित के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं या फिर 125 कैंट सीट पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए कंबल को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है?

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