धामी कैबिनेट का ‘सुपर सिक्स’ प्रहार: कर्मचारियों को बोनस की सौगात और अपराधियों पर नकेल, जानें बड़े फैसले
रिपोर्ट: अज़हर मलिक
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने आज प्रदेश के विकास और जनहित की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कैबिनेट बैठक में छह ऐसे प्रस्तावों पर मुहर लगा दी है, जो सीधे तौर पर राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था को नई ऊर्जा देंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सरकार ने जहाँ एक ओर कर्मचारियों की जेब भरने का इंतजाम किया है, वहीं दूसरी ओर नशे के सौदागरों और आदतन अपराधियों को कड़ा संदेश भेजते हुए कानून व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने की रणनीति तैयार की है। यह कैबिनेट बैठक न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से अहम रही, बल्कि इसमें लिए गए फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब राज्य में अनुशासन और विकास के बीच एक नया संतुलन बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशियों की दस्तक देते हुए कैबिनेट ने श्रम विभाग के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। कोविड काल की मजबूरियों के कारण रोके गए ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965’ को राज्य में फिर से बहाल कर दिया गया है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि अब कर्मचारियों को उनके हक का बोनस पूर्व की भांति मिलना शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही, दैनिक श्रमिकों के लिए भी सरकार ने दरियादिली दिखाई है; अब तक जिन 589 श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का लाभ नहीं मिल पा रहा था, उन्हें अब 18,000 रुपये का न्यूनतम वेतनमान दिए जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ESI डॉक्टरों की नियमावली में संशोधन करते हुए 94 नए पदों के सृजन का रास्ता साफ किया गया है, जिसमें सीनियर मेडिकल ऑफिसर और असिस्टेंट डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं और इनका चयन मेडिकल सिलेक्शन बोर्ड के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।
राज्य की सुरक्षा और कृषि समृद्धि को लेकर भी कैबिनेट ने दूरगामी फैसले लिए हैं। गृह विभाग में नारकोटिक ड्रग्स एक्ट के तहत DSP सहित 22 नए पदों के सृजन पर सहमति देकर सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और मजबूत किया है, जबकि जेलों में ‘हैबिटुअल ऑफेंडर’ (आदतन अपराधी) की श्रेणी को परिभाषित कर बार-बार अपराध करने वालों के खिलाफ केंद्र के समान सख्त कानून लागू करने की तैयारी कर ली है। किसानों और लघु उद्यमियों के सुनहरे भविष्य के लिए कृषि विभाग की ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य योजना’ के साथ अब ‘मुख्यमंत्री खाद्य योजना’ को जोड़ा गया है, जिसके तहत 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी देकर स्वरोजगार को एक नई उड़ान देने की कोशिश की गई है। धामी कैबिनेट के ये छह फैसले न केवल उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेंगे, बल्कि समाज के हर तबके को यह भरोसा दिलाएंगे कि सरकार उनकी जरूरतों और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है।