कत्लगाह बनी राजधानी: सिसकती कानून-व्यवस्था के बीच सीएम धामी का ‘हंटर’, क्या खाकी की नाकामी पर भारी पड़ेगा ‘जीरो टॉलरेंस’?
देहरादून की शांत वादियों में इन दिनों हवाओं के साथ दहशत का पहरा है और गलियां मासूमों व अपनों के खून से सुर्ख हो रही हैं; महज़ दो हफ्तों के भीतर चार रूह कंपा देने वाले कत्ल ने राजधानी को किसी श्मशान की खामोशी में तब्दील कर दिया है। शहर के बीचों-बीच जब अपनों का खून सड़कों पर बहता है, तो उन परिवारों के चीखते दर्द और आंसू पुलिस के दावों की बखिया उधेड़ देते हैं, जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को हमेशा के लिए खो दिया है।
सवाल यह है कि क्या देहरादून पुलिस सो रही है या अपराधियों के मन से खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? बदहाल कानून-व्यवस्था अब बैसाखियों के सहारे रेंगती नजर आ रही है, जहाँ अपराधियों की गोलियां और खंजर बेखौफ चल रहे हैं, और आम आदमी अपनी दहलीज लांघने से भी कतराने लगा है। इस खूनी खेल और शहर में फैली कत्लो-गारत की सनसनी के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मोर्चा संभाल लिया है। बीती रात उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री का सख्त तेवर यह साफ कर गया कि वे सिस्टम में लगी इस जंग को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। जहाँ एक तरफ राजधानी की पुलिस कटघरे में खड़ी है, वहीं मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ का मतलब अब धरातल पर दिखेगा और हर अपराधी की जगह सलाखों के पीछे होगी। धामी की इस गंभीरता ने उन लापरवाह अफसरों की नींद उड़ा दी है जिनकी नाक के नीचे शहर अपराध का अड्डा बन गया था, अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री का यह ‘हंटर’ बेपटरी हो चुकी व्यवस्था को कितनी जल्दी वापस पटरी पर लाता है और क्या उन पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिल पाएगा जिनके आंगन आज कत्ल की वारदातों से सूने हो चुके हैं।