चीतों की दहाड़ के बीच कूनो से आई ‘गुमशुदा’ शिकारी की गूंज: 113 साल तक दुनिया की नजरों से ओझल रहने वाले इस दुर्लभ परिंदे ने बदली जंगल की कहानी!
अज़हर मलिक
मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क, जो अब तक केवल अफ्रीकी चीतों के नए ठिकाने के तौर पर पूरी दुनिया में मशहूर था, वहां से अब एक ऐसी जादुई खबर आई है जिसने वन्यजीव वैज्ञानिकों को जश्न मनाने का मौका दे दिया है। दरअसल, जिस कूनो को हम चीतों की रफ्तार के लिए जानते हैं,
उसी घने जंगल में अब भारत के सबसे रहस्यमयी शिकारी ‘फॉरेस्ट आउलेट’ (एथिन ब्लेविटी) की पहली बार एंट्री हुई है। यह कोई साधारण पक्षी नहीं है, बल्कि कुदरत का वह अनमोल रत्न है जिसे 1884 के बाद करीब 113 सालों तक पूरी दुनिया ने विलुप्त मान लिया था। साल 1997 में जब इसे अचानक महाराष्ट्र के नंदुरबार में देखा गया तो पूरी दुनिया दंग रह गई थी, लेकिन अब कूनो के आसमान में इसकी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है
कि भारत की जैव-विविधता कितनी तेज़ी से अपनी खोई हुई विरासत वापस पा रही है। श्योपुर जिले में स्थित इस जंगल की चर्चा अब सिर्फ चीतों की वजह से नहीं होगी, क्योंकि इस छोटे से जादुई उल्लू का दिखना एक बड़ा शुभ संकेत है कि कूनो का ईकोसिस्टम अब बेहद सुरक्षित और समृद्ध हो चुका है। वन विभाग के अधिकारियों के लिए यह खोज किसी जैकपॉट से कम नहीं है, क्योंकि फॉरेस्ट आउलेट का दोबारा विस्तार होना यह बताता है कि हमारे संरक्षण के प्रयास सही दिशा में हैं। अब कूनो की पहचान एक ऐसे ‘सुपर जंगल’ के रूप में उभरी है, जहाँ धरती के सबसे तेज़ दौड़ने वाले चीते और सदियों पुराने इतिहास को समेटे हुए ये दुर्लभ उल्लू एक साथ अपनी सल्तनत चला रहे हैं।