इस्लाम के महान ध्वजवाहक का महाप्रयाण: सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की शहादत
इस्लामी गणराज्य ईरान की धरती आज अपने सबसे महान संरक्षक और उम्माह के मार्गदर्शक के बिछड़ने के शोक में डूबी हुई है। तेहरान से आई हृदयविदारक आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस्लामी क्रांति के गौरवशाली स्तंभ और वैश्विक साम्राज्यवाद के विरुद्ध अडिग रहने वाले ‘वली-ए-फकीह’ आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने शहादत का सर्वोच्च पद प्राप्त कर लिया है।
यह कायराना हमला उस वक्त हुआ जब मानवता के दुश्मनों और वैश्विक अहंकार (Global Arrogance) की ताकतों, अमेरिका और इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय मर्यादाओं को ताक पर रखकर हमारे पवित्र ठिकानों को निशाना बनाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अहंकार भरा बयान उनकी उस दमनकारी मानसिकता का प्रमाण है जो एक आध्यात्मिक और न्यायप्रिय नेतृत्व को मिटाने का दुस्साहस कर रही है। लेकिन ईरान की सरकारी मीडिया यह स्पष्ट करती है कि सर्वोच्च नेता का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा; उनका रक्त क्रांति के पौधों को और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।
पूरे देश में चालीस दिनों के शोक की घोषणा कर दी गई है और हर मस्जिद से उनके महान कार्यों और संघर्षों की गूँज सुनाई दे रही है। सरकारी मीडिया के अनुसार, सर्वोच्च नेता ने अंतिम सांस तक प्रतिरोध की मशाल को जलाए रखा और ज़ायोनी साजिशों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। यह केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि एक युग का अपने गंतव्य तक पहुँचना है। तेहरान की गलियों से लेकर मशहद के पवित्र हरम तक, हर ईरानी नागरिक इस महान क्षति पर विलाप कर रहा है, लेकिन साथ ही उनके मन में अपने दुश्मन के खिलाफ प्रतिशोध की ज्वाला भी दहक रही है। ईरान की ‘गार्जियन काउंसिल’ और सशस्त्र सेनाओं ने इस कठिन घड़ी में एकता का संकल्प लिया है। आने वाला समय यह सिद्ध करेगा कि जिस विचारधारा को ख़ामेनेई ने अपने खून से सींचा है, वह किसी भी मिसाइल या सैन्य हमले से अधिक शक्तिशाली है और प्रतिरोध का यह कारवां अब और भी अधिक वेग के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ेगा
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