ना नियम, ना कानून और ना ही चालान; मंत्री जी के लिए क्या बदल गया है सारा संविधान?
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की स्कूटी सवारी ने प्रदेश के यातायात नियमों और प्रशासनिक निष्पक्षता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, जहाँ सादगी का संदेश देने की होड़ में कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस स्कूटी का इंश्योरेंस मार्च के महीने में ही खत्म हो चुका था, उस पर मंत्री जी बिना किसी डर के सड़क पर उतर आए और ताज्जुब देखिए कि ना तो कोई नियम आड़े आया, ना ही कानून की किसी धारा ने उन्हें रोका और ना ही डिजिटल पुलिस का वो चालान कटा जो आम जनता की जेब पर जरा सी चूक होते ही बिजली की तरह गिरता है। यह साफ़ तौर पर दोहरे मापदंडों की पराकाष्ठा है जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री की अपील का हवाला देकर जनता को उपदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद मंत्री जी बिना वैध कागजों के वाहन चलाकर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। सबसे दिलचस्प तो यह रहा कि जैसे ही सोशल मीडिया पर इस लापरवाही की चर्चा शुरू हुई, वैसे ही सिस्टम ने ऐसी ‘वीआईपी’ फुर्ती दिखाई कि महीनों से पेंडिंग पड़ा इंश्योरेंस आनन-फानन में रातों-रात अपडेट कर दिया गया ताकि मंत्री जी की साख बचाई जा सके। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि प्रदेश में नियम और चालान की सख्ती शायद सिर्फ उन आम लोगों के लिए है जिनके पास रसूख की ताकत नहीं है, क्योंकि अगर यही गलती किसी साधारण नागरिक ने की होती तो अब तक उसकी गाड़ी सीज हो चुकी होती, लेकिन यहाँ तो सत्ता के प्रभाव में ना कोई डर दिखा और ना ही कानून का कोई असर।



