काशीपुर एल.डी. भट्ट अस्पताल में ‘वर्दीहीन’ कारिंदों का कब्जा, क्या गरीब की लाचारी पर भारी है पार्किंग का ठेका?
अज़हर मलिक
काशीपुर के एल.डी. भट्ट उपजिला चिकित्सालय में इन दिनों नियमों की नहीं, बल्कि ‘पार्किंग माफिया’ की मर्जी चलती है। अस्पताल परिसर का नजारा सरकारी व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है, जहाँ प्रवेश करते ही बिना किसी आधिकारिक वर्दी और बिना किसी पहचान पत्र के खड़े लोग तीमारदारों को घेर लेते हैं। मानवता को शर्मसार करती यह तस्वीर देखिए, जहाँ अस्पताल के गेट पर ही एक व्यक्ति साधारण कपड़ों में बैठकर वसूली का अड्डा चला रहा है। जरा उस गरीब इंसान के दर्द की कल्पना कीजिए जो सुदूर गांव से किसी तरह अपनी पुरानी मोटर साइकिल या टूटी हुई बाइक मांग कर बीमार परिजन को लेकर अस्पताल पहुँचता है।
उसे इलाज की कतार में लगने से पहले इन वर्दीहीन कारिंदों की कतार से गुजरना पड़ता है, जहाँ उसकी जेब में बचे आखिरी चंद सिक्के भी पार्किंग के नाम पर झटक लिए जाते हैं। एक तरफ अस्पताल की दीवारों पर स्वच्छता और सेवा के बड़े-बड़े स्लोगन लिखे हैं, तो दूसरी तरफ उसी के साये में बिना किसी जवाबदेही के यह वसूली का खेल धड़ल्ले से जारी है। नियम कहते हैं कि पार्किंग स्टाफ को वर्दी और आई कार्ड में होना चाहिए, लेकिन यहाँ तो कानून को ठेंगे पर रखा गया है।
जिलाधिकारी महोदय, क्या यह सरेआम हो रही मनमानी आपके संज्ञान में है? एसएमओ साहब, क्या अस्पताल की गरिमा और गरीबों की जेब इन ठेकेदारों के रहमोकरम पर छोड़ दी गई है? आखिर कब तक सरकारी अस्पताल के नाम पर गरीबों का यह शोषण जारी रहेगा और प्रशासन कब इन सफेदपोश कारिंदों से उस मजबूर इंसान के दर्द का हिसाब मांगेगा?



