दलालों की मुट्ठी में रामनगर ARTO: बिना ‘सेटिंग’ फेल, दलाल के साथ खेल पास; क्या यही है धामी सरकार का भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड?
अज़हर मलिक
रामनगर: रामनगर एआरटीओ (ARTO) कार्यालय इन दिनों जनसेवा का केंद्र कम और भ्रष्टाचार का अड्डा ज्यादा नजर आ रहा है। आम जनता के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है। अगर कोई आम नागरिक बिना किसी दलाल या सोर्स-सिफारिश के सीधे दफ्तर पहुंचकर लाइसेंस बनवाने की कोशिश करता है, तो उसे नियमों और तकनीकी कमियों का जाल बिछाकर बार-बार फेल कर दिया जाता है। अधिकारियों का रवैया ऐसा है मानो बिना दलाल के पहुंचे व्यक्ति का काम न करने की कसम खा रखी हो। ‘रिसेट’ और री-टेस्ट के नाम पर आम लोगों को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया जा रहा है और समय व पैसे दोनों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है।
इसके ठीक उलट, एआरटीओ दफ्तर में जारी दलाली का खेल इतना संगठित है कि दलालों के जरिए आने वाली फाइलों पर बिना किसी अड़चन के एक ही बार में हरी झंडी मिल जाती है। जो व्यक्ति सीधे टेस्ट देने पर ‘अयोग्य’ ठहरा दिया जाता है, वही व्यक्ति जब किसी एजेंट की जेब गर्म करके टेस्ट ट्रैक पर उतरता है, तो अधिकारी उसकी तमाम कमियों पर पर्दा डालकर उसे तुरंत पास कर देते हैं। इस दोहरे रवैये ने परिवहन विभाग के अधिकारियों और दलालों के बीच के उस गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है, जो लंबे समय से जनता की जेब पर डाका डाल रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर दलालों की लाई फाइलों में ऐसा कौन सा ‘जादू’ होता है जो अफसरों की आंखें बंद हो जाती हैं?
रामनगर ARTO कार्यालय में चल रहा यह काला कारोबार राज्य की धामी सरकार के “जीरो टॉलरेंस” और “भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड” के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही नाक के नीचे परिवहन विभाग के अधिकारी दलालों की शह पर समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। अगर निष्पक्ष जांच की जाए, तो रामनगर एआरटीओ में चल रहा यह पूरा सिंडिकेट बेनकाब हो सकता है। फिलहाल, ARTO कार्यालय की इस मनमानी और दलाल राज से त्रस्त आम जनता अब शासन-प्रशासन से इस गठजोड़ पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है।



