गोल्ड लोन धारक के आभूषण न लौटाना बैंक को पड़ा भारी: उपभोक्ता आयोग ने यूको बैंक पर लगाया जुर्माना, ब्याज सहित मूल्य चुकाने का दिया आदेश
अज़हर मलिक
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग उधमसिंह नगर ने बैंक में गिरवी रखे स्वर्ण आभूषणों की सुरक्षा में लापरवाही और उन्हें उपभोक्ता को वापस न लौटाने को सेवा में गंभीर कमी माना है। आयोग ने यूको बैंक को आदेश दिया है कि वह जसपुर निवासी परिवादी के गोल्ड लोन के बदले रखे 94.640 ग्राम 24 कैरेट सोने के आभूषण 45 दिनों के भीतर ज्यों के त्यों वापस करे। यदि बैंक आभूषण लौटाने में असमर्थ रहता है, तो उसे लोन चुकता होने की तिथि 31 जनवरी 2019 के दिन बाजार दर के अनुसार सोने का मूल्य 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ अदा करना होगा। इसके अलावा आयोग ने बैंक पर 5 हजार रुपये का मानसिक क्षतिपूर्ति मुआवजा और 2 हजार रुपये का वाद व्यय भी परिवादी को देने का फैसला सुनाया है।
यह पूरा मामला जसपुर निवासी पंकज कुमार का है, जिन्होंने अपने अधिवक्ता नदीम उद्दीन के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। परिवादी ने यूको बैंक की जसपुर शाखा के गोल्ड लोन विज्ञापन और अधिकारियों के दावों पर विश्वास करते हुए अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए सोने के गहने गिरवी रखकर दो लाख रुपये का लोन लिया था। परिवादी ने जनवरी 2019 में ही 2,31,450 रुपये की कुल धनराशि ब्याज सहित जमा करके लोन चुकता कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2023 में जब उन्होंने अपने आभूषण वापस मांगे, तो बैंक ने न तो गहने लौटाए और न ही इसका कोई संतोषजनक कारण बताया। अधिवक्ता नदीम उद्दीन द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया, जिसके बाद उपभोक्ता आयोग की शरण ली गई।
दूसरी ओर, बैंक ने आयोग में अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि 11 जुलाई 2018 को बैंक के चपरासी दुष्यंत कुमार ने ये आभूषण चोरी कर लिए थे, जिसके बाद आरोपी को निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराई गई और मामले में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। बैंक ने दावा किया कि चोरी की सूचना परिवादी को फोन पर दे दी गई थी और 2,86,087 रुपये के मुआवजे का समझौता पत्र भी भेजा गया था, इसलिए बैंक की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं हुई है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चन्द्र चंदौला और सदस्या डॉ. मनीला की पीठ ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद बैंक के दावों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक के गिरवी रखे गहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक की है और आभूषण न लौटाना उपभोक्ता सेवा में सीधी लापरवाही है, जिसके तहत यह ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया।



