Alhamdu Ki Surat Hindi Mein: नमाज़ की सबसे ज़रूरी सूरत, जानें इसका अर्थ और फ़ज़ीलत
जब भी हम अल्लाह की बारगाह में नमाज़ के लिए हाथ बांधते हैं, तो सबसे पहले जो कलाम हमारी जुबान पर आता है, वह है ‘सूरह फातिहा’ यानी अल्हम्दु शरीफ। इसे कुरान-ए-पाक की रूह कहा जाता है। रमज़ान का महीना करीब है और इस पाक महीने में हर मोमिन की ख्वाहिश होती है कि वह अपनी नमाज़ों को दुरुस्त करे। अगर आप भी अल्हम्दु की सूरत हिंदी में ढूंढ रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए, इसे सही उच्चारण और इसके गहरे मतलब के साथ समझते हैं।
अल्हम्दु की सूरत (सूरह फातिहा) – हिंदी इबारत
नमाज़ में पढ़ने के लिए इसका सही उच्चारण (Pronunciation) बहुत ज़रूरी है। यहाँ इसे आसान हिंदी में दिया गया है:
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
अर्रहमान निर्रहीम
मालिकि यौमिद्दीन
इय्याका नाअबुदु व इय्याका नस्तईन
इहदिनस सिरातल मुस्तकीम
सिरातल लज़ीना अनअम्ता अलैहिम
ग़ैरिल मग़ज़ूबि अलैहिम वलद-द्वाल्लीन (आमीन)
अल्हम्दु शरीफ का हिंदी मतलब (Translation)
अल्लाह से की जाने वाली यह दुआ कितनी खूबसूरत है, इसका अंदाज़ा इसके तर्जुमे से लगाया जा सकता है:
तारीफ अल्लाह के लिए: तमाम तारीफें सिर्फ अल्लाह के लिए हैं, जो सारे जहानों का पालने वाला (रब) है।
रहम करने वाला: जो बहुत मेहरबान और बार-बार रहम करने वाला है।
रोज़-ए-जज़ा का मालिक: जो इंसाफ के दिन (कयामत) का अकेला मालिक है।
सिर्फ तेरी इबादत: (ऐ अल्लाह!) हम सिर्फ तेरी ही इबादत करते हैं और सिर्फ तुझ ही से मदद मांगते हैं।
सीधा रास्ता: हमें सीधे और सच्चे रास्ते पर चला।
इनाम वालों का रास्ता: उन लोगों के रास्ते पर जिन पर तूने अपना इनाम (फज़्ल) किया।
भटके हुओं से बचाव: उनका रास्ता नहीं जिन पर तेरा गजब (गुस्सा) हुआ और न ही उनका जो हक के रास्ते से भटक गए।
इस सूरत की अहमियत (क्यों है यह खास?)
अल्हम्दु की सूरत के बिना कोई भी नमाज़ (चाहे वह फर्ज हो या सुन्नत) पूरी नहीं होती। इसे ‘शिफा’ की सूरत भी कहा जाता है, यानी इसमें बीमारियों से शिफा भी छुपी है। रमज़ान में जब आप इस सूरत को पढ़ेंगे, तो इसके मतलब को ज़हन में रखें ताकि आपकी इबादत में और ज़्यादा सुकून पैदा हो।