अल्हम्दु शरीफ (सूरा-ए-फातिहा) – हिंदी अनुवाद और अर्थ
यह सूरत हर नमाज की हर रकात में पढ़ी जाती है। इसमें कुल 7 आयतें हैं।
अरबी का हिंदी उच्चारण (Transliteration):
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलम़ीन
अर-रहमानिर-रहीम
मालिकि यौमिद्दीन
इय्याका ना़बुदु व इय्याका नस्तई़न
इहदिनस सिरातल मुस्तक़ीम
सिरातल लज़ीना अनअ़मता अलैहिम, गै़रिल मग़ज़ूबि अलैहिम वलद-द्वाल्लीन (आमीन)
विस्तार पूर्वक हिंदी अर्थ (Meaning in Hindi):
- बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम: अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान और निहायत रहम वाला है।
- अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलम़ीन: सब तारीफें अल्लाह ही के लिए हैं जो तमाम जहानों (दुनियाओं) का पालने वाला है।
- अर-रहमानिर-रहीम: जो बहुत मेहरबान और निहायत रहम करने वाला है।
- मालिकि यौमिद्दीन: जो इंसाफ के दिन (कयामत के दिन) का मालिक है।
- इय्याका ना़बुदु व इय्याका नस्तई़न: (ऐ अल्लाह!) हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद मांगते हैं।
- इहदिनस सिरातल मुस्तक़ीम: हमें सीधा रास्ता दिखा।
- सिरातल लज़ीना अनअ़मता अलैहिम: उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने अपना इनाम (फज़ल) किया।
- गै़रिल मग़ज़ूबि अलैहिम वलद-द्वाल्लीन: उनका रास्ता नहीं जिन पर तेरा गजब (गुस्सा) हुआ और न ही उनका जो रास्ते से भटक गए।
- आमीन: (ऐ अल्लाह! हमारी यह दुआ कुबूल फरमा)।
अल्हम्दु शरीफ की अहमियत (Importance):
- दुआ और इबादत का मेल: इस सूरत में पहले अल्लाह की तारीफ की जाती है और फिर उससे सीधा रास्ता (सिरात-ए-मुस्तकीम) दिखाने की दुआ मांगी जाती है।
- हर बीमारी की शिफा: हदीस के अनुसार, इसे ‘सूरा-ए-शिफा’ भी कहा जाता है। इसे पढ़कर दम करने से अल्लाह बीमारियों से निजात देता है।
- नमाज का स्तंभ: बिना अल्हम्दु शरीफ पढ़े नमाज मुकम्मल नहीं होती।
सूरा-ए-फातिहा (अल्हम्दु शरीफ)
“सब तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जो पूरे कायनात का रब है।”
हिंदी अनुवाद: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और रहम वाला है। हम सिर्फ तेरी इबादत करते हैं और तुझसे ही मदद मांगते हैं। हमें सीधा रास्ता दिखा, उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम किया।