Alvida Jumma 2026: रमजान के आखिरी जुम्मे की फजीलत, जानें तारीख और इस दिन की खास इबादत
जैसे-जैसे रमजान का मुकद्दस महीना अपने आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ता है, मोमिनों के दिलों में एक अजीब सी तड़प और उदासी छाने लगती है। यह उदासी है बरकतों वाले महीने के रुखसत होने की। रमजान का आखिरी जुम्मा, जिसे हम ‘अलविदा जुम्मा’ कहते हैं, इबादत और दुआओं के कबूल होने का सबसे बड़ा जरिया है। साल 2026 में अलविदा जुम्मा किस तारीख को है और इस दिन हमें अल्लाह को कैसे राजी करना चाहिए, आइए विस्तार से जानते हैं।
कब है अलविदा जुम्मा 2026? (तारीख और वक्त)
चांद की तारीखों के मुताबिक, साल 2026 में रमजान का पाक महीना फरवरी के मध्य से शुरू होकर मार्च के मध्य तक चलेगा।
संभावित तारीख: इस साल अलविदा जुम्मा 20 मार्च 2026 को होने की उम्मीद है।
(नोट: चांद के दीदार के अनुसार तारीख में एक दिन का बदलाव हो सकता है, इसलिए स्थानीय मस्जिद के कैलेंडर पर नजर रखें।)
अलविदा जुम्मा की अहमियत और फजीलत
इस्लाम में जुम्मे का दिन वैसे ही बहुत अफजल (महान) माना गया है, लेकिन रमजान का आखिरी जुम्मा अपनी खास अहमियत रखता है:
दुआओं की कबूलियत: हदीस के मुताबिक, जुम्मे के दिन एक घड़ी ऐसी आती है जब बंदा जो भी जायज दुआ मांगता है, अल्लाह उसे रद्द नहीं करता। अलविदा जुम्मा साल भर के तमाम जुम्मों का सरदार माना जाता है।
गुनाहों की माफी: यह दिन तौबा का दिन है। मोमिन इस उम्मीद के साथ मस्जिद में सजदा करते हैं कि पूरे महीने की इबादतों में जो कमी रह गई, अल्लाह इस आखिरी जुम्मे के सदके उसे माफ कर दे।
रमजान की विदाई: ‘अलविदा’ का मतलब है रुखसत होना। यह दिन हमें याद दिलाता है कि नेकियां कमाने का यह खास सीजन अब खत्म होने वाला है।
अलविदा जुम्मे के दिन क्या करें?
गुस्ल और खुशबू: जुम्मे की नमाज से पहले गुस्ल करें, साफ-सुथरे कपड़े पहनें और इत्र लगाएं।
सूरह कहफ की तिलावत: जुम्मे के दिन सूरह कहफ पढ़ना बहुत बरकत वाला काम है।
सदका और खैरात: इस दिन गरीबों की मदद करें और अपना ‘फितरा’ निकालें ताकि गरीब भी आपके साथ ईद मना सकें।
खास दुआ: नमाज के बाद पूरी इंसानियत की सलामती, अपने मरहूमों (पूर्वजों) की मफिरत और अपने गुनाहों की माफी के लिए रो-रोकर दुआ करें।
अलविदा जुम्मा की खास दुआ (हिंदी में)
अल्लाह से इस तरह इल्तिजा करें:
“ऐ अल्लाह! इस पाक महीने और इस आखिरी जुम्मे के सदके हमारे तमाम गुनाहों को माफ फरमा। हमारी इबादतों को कुबूल कर और हमें अगले साल फिर से रमजान नसीब फरमा। आमीन।”