Eid-ul-Fitr 2026: इबादत का इनाम है ईद, जानें तारीख, नमाज़ का तरीका और इसका खास महत्व
पूरे एक महीने के कड़े सब्र, इबादत और रोज़ों के बाद जब आसमान पर ईद का प्यारा सा चांद नजर आता है, तो वह अपने साथ खुशियों का पैगाम लेकर आता है। ईद-उल-फितर सिर्फ लजीज पकवानों या नए कपड़ों का नाम नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की तरफ से उन बंदों के लिए एक इनाम है जिन्होंने कड़ी धूप और भूख-प्यास में भी अपने रब की फरमाबरदारी की। चलिए जानते हैं साल 2026 में ईद कब है और इस दिन की रूहानी अहमियत क्या है।
कब मनाई जाएगी ईद-उल-फितर 2026?
ईद की तारीख पूरी तरह से चांद के दीदार पर निर्भर करती है।
संभावित तारीख: कैलेंडर के हिसाब से 20 या 21 मार्च 2026 को भारत में ईद मनाई जा सकती है।
अगर 29 रमजान को चांद दिख गया तो अगले दिन ईद होगी, वरना 30 रोजे पूरे होने के बाद धूमधाम से खुशियां मनाई जाएंगी।
ईद की सुबह और नमाज़ का तरीका
ईद के दिन की शुरुआत बहुत ही पाकीज़ा तरीके से होती है:
सुन्नत तरीका: सुबह जल्दी उठना, मिस्वाक करना, गुस्ल करना, बेहतरीन (हो सके तो नए) कपड़े पहनना और इत्र लगाना सुन्नत है।
कुछ मीठा खाकर जाना: ईद की नमाज़ के लिए जाने से पहले कुछ मीठा (जैसे खजूर या सिवैयां) खाना नबी करीम (SAW) की सुन्नत है।
ईदगाह का सफर: नमाज़ के लिए जाते समय पैदल जाना और तकबीरें पढ़ना बहुत अफजल है।
नमाज़ की नीयत: ईद की नमाज़ में 6 जायद (अतिरिक्त) तकबीरें होती हैं। यह नमाज़ खुदा का शुक्रिया अदा करने का तरीका है।
‘सदका-ए-फितर’ की अहमियत: गरीबों को न भूलें
ईद की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें अमीर और गरीब के बीच की दीवार गिर जाती है। नमाज़ से पहले ‘फितरा’ देना हर साहिबे-हैसियत मुसलमान पर वाजिब है। इसका मकसद यह है कि आपके इलाके का कोई भी गरीब शख्स ईद के दिन भूखा न रहे और वह भी नए कपड़े पहनकर खुशियां मना सके।
गले मिलना और आपसी भाईचारा
नमाज़ के बाद जब लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं, तो सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते हैं। ‘ईद मुबारक’ की गूंज और घर-घर में बनी मीठी सिवैयां इस त्योहार की मिठास को और बढ़ा देती हैं। यह दिन अपनों से मिलने, पड़ोसियों का हाल जानने और समाज में प्यार बांटने का दिन है।