चुनाव 2025 में बाहरी हस्तक्षेप – सोशल मीडिया फेक न्यूज और डिजिटल मैनिपुलेशन का बढ़ता खतरा

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चुनाव 2025 में बाहरी हस्तक्षेप – सोशल मीडिया फेक न्यूज और डिजिटल मैनिपुलेशन का बढ़ता खतरा

 

भारत में 2025 का चुनावी माहौल जितना तेज़ और हाई-टेक है, उतना ही बाहरी हस्तक्षेप (External Interference) और सोशल मीडिया फेक न्यूज (Fake News) का खतरा भी बढ़ गया है। पहले जहां चुनावी दखल सिर्फ प्रचार और वोटिंग तक सीमित था, अब डिजिटल युग में यह साइबर अटैक, डेटा मैनिपुलेशन, बॉट-ड्रिवन कैंपेन और डीपफेक वीडियो तक फैल चुका है। चुनाव आयोग और साइबर सुरक्षा एजेंसियां पहले से कहीं ज्यादा सतर्क हैं, क्योंकि इस बार चुनाव प्रक्रिया पर सोशल मीडिया के जरिए दुष्प्रचार और विदेशी हस्तक्षेप के संकेत मिले हैं। WhatsApp, Facebook, Instagram, X (Twitter) और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर झूठी सूचनाएं, गलत आंकड़े, और एडिटेड वीडियो तेजी से फैलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य मतदाताओं की राय को प्रभावित करना है।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि फेक न्यूज अब सिर्फ अफवाह नहीं बल्कि एक सुनियोजित चुनावी हथियार बन चुकी है। कई बार यह झूठी खबरें इतनी पेशेवर तरीके से तैयार की जाती हैं कि आम मतदाता असली और नकली में फर्क नहीं कर पाते। डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके नेताओं की नकली आवाज़ और वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें विवादित बयान देते हुए दिखाया जाता है। इसके जरिए न केवल किसी की छवि खराब की जाती है बल्कि चुनावी एजेंडा भी बदला जा सकता है।

 

चुनाव आयोग ने इस खतरे से निपटने के लिए IT मंत्रालय और सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर ‘रियल-टाइम फैक्ट चेक सिस्टम’ शुरू किया है, ताकि फेक कंटेंट को जल्द से जल्द हटाया जा सके। इसके अलावा, चुनावी अवधि में राजनीतिक विज्ञापनों के लिए सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया लागू की गई है। विदेशी सर्वर और IP एड्रेस से आने वाले कैंपेन को ट्रैक करने के लिए साइबर इंटेलिजेंस टीमें भी सक्रिय हैं।

 

मतदाताओं को जागरूक करने के लिए डिजिटल लिटरेसी कैंपेन चलाया जा रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचना क्यों जरूरी है। स्कूल, कॉलेज और ग्राम पंचायत स्तर पर भी वर्कशॉप हो रहे हैं ताकि युवा और ग्रामीण मतदाता फेक न्यूज के शिकार न बनें।

 

2025 में बाहरी हस्तक्षेप का असर सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। ईमेल फिशिंग, डेटा ब्रीच और हैकिंग के जरिए भी मतदाता डेटा और पार्टी स्ट्रेटेजी चुराने की कोशिशें हो रही हैं। चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन-बेस्ड वोटिंग सिक्योरिटी और एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रांसफर जैसी नई तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है।

 

अगर इस बार चुनाव परिणामों पर फेक न्यूज या बाहरी हस्तक्षेप का सीधा असर देखने को मिलता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी। इसीलिए विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल लोकतांत्रिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि उसे कमजोर करने के लिए। 2025 का यह चुनाव यह भी साबित करेगा कि क्या भारत डिजिटल युग में फ्री और फेयर इलेक्शन कराने में सक्षम है, या फिर फेक न्यूज का जाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हावीहो जाएगा।

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