रमजान का पहला जुम्मा: बरकत, रहमत और मगफिरत का खास दिन
रमजानुल मुबारक का पाक महीना अपनी तमाम खूबियों के साथ जारी है। इस मुकद्दस महीने में जुम्मे (शुक्रवार) की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। आज रमजान का पहला जुम्मा है, जिसे ‘नयमतों वाला दिन’ भी कहा जाता है।
1. रमजान के जुम्मे की क्या विशेषता है?
आम दिनों के मुकाबले रमजान के जुम्मे का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। हदीस के मुताबिक, जुम्मा तमाम दिनों का सरदार है और रमजान का जुम्मा इबादत, दुआ और सखावत (दान) के लिए बेहतरीन मौका होता है।
गुनाहों की माफी: मान्यता है कि जो शख्स रमजान के जुम्मे की नमाज पूरी शिद्दत और पाबंदी से अदा करता है, अल्लाह उसके छोटे गुनाहों को माफ फरमाता है।
दुआओं की कबूलियत: जुम्मे के दिन एक ऐसी घड़ी (वक्त) आती है, जिसमें मांगी गई हर जायज दुआ कबूल होती है। रमजान में रोजे की हालत में यह वक्त और भी कीमती हो जाता है।
2. रमजान का मतलब क्या है?
‘रमजान’ शब्द अरबी के ‘रम्ज़’ से बना है, जिसका मतलब होता है ‘जला देना’।
यह महीना मोमिनों के गुनाहों को नेक इबादतों के जरिए जलाकर राख कर देता है।
यह आत्म-संयम, धैर्य और खुदा की इबादत में खुद को समर्पित करने का नाम है।
इसी महीने में कुरान-ए-पाक नाजिल (उतरा) हुआ था, जो इसे सबसे मुकद्दस बनाता है।
3. पहले जुम्मे पर क्या खास करें?
अगर आप अपनी वेबसाइट के पाठकों को सुझाव देना चाहते हैं, तो ये पॉइंट्स जोड़ सकते हैं:
सूरह कहफ की तिलावत: जुम्मे के दिन सूरह कहफ पढ़ना नूर (रोशनी) पैदा करता है।
कसरत से दरूद शरीफ: नबी-ए-करीम (स.अ.व.) पर दरूद पढ़ना इस दिन सबसे अफजल इबादत है।
इफ्तार और सदका: पहले जुम्मे पर गरीबों को खाना खिलाना या इफ्तार कराना बहुत बड़ी नेकी है।
4. जुम्मे की मुबारकबाद का संदेश
“अल्लाह इस पहले जुम्मे के सदके आपकी हर दुआ कबूल फरमाए, आपके घर में बरकत अता करे और आपके तमाम रोजों को अपनी बारगाह में मकबूल फरमाए। आमीन!”