ज़रूर, सूरह अल-फातिहा (अल्हम्दु की सूरत) की फज़ीलत बहुत ज़्यादा है। इसे कुरान की सबसे महत्वपूर्ण सूरत माना जाता है। यहाँ इसके कुछ प्रमुख महत्व दिए गए हैं:
सूरह अल-फातिहा की फज़ीलत (महत्व)
कुरान का सार (Umm al-Kitab): इसे ‘उम्मुल किताब’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है “किताब की माँ”। इसमें पूरे कुरान का निचोड़ मौजूद है।
नमाज़ का अनिवार्य हिस्सा: इसके बिना कोई भी नमाज़ पूरी नहीं होती। हर रकात में इसे पढ़ना ज़रूरी है।
शिफा (इलाज) की सूरत: हदीस के अनुसार, इस सूरत में हर बीमारी से शिफ़ा (इलाज) है। इसे ‘सूरह-ए-शिफा’ भी कहा जाता है।
अल्लाह से बातचीत: जब बंदा इस सूरत को पढ़ता है, तो अल्लाह हर आयत का जवाब देता है। यह सीधे खालिक (बनाने वाले) और मखलूक (बंदे) के बीच एक संवाद है।
दुआओं की कुबूलियत: इसे पढ़ने से अल्लाह का शुक्र अदा होता है और सीधा रास्ता (सिरात-ए-मुस्तकीम) पाने की दुआ की जाती है, जो कि सबसे बड़ी हिदायत है।
क्या आप जानना चाहेंगे कि:
नमाज़ में इस सूरत को पढ़ने का सही तरीका क्या है?
या फिर आप ‘आयतुल कुर्सी’ या ‘सूरह इखलास’ (कुल हुवल्लाह) का अनुवाद और महत्व जानना चाहेंगे?