नमाज पढ़ने का सही और मुकम्मल तरीका, जानें रूहानी सुकून के साथ इबादत का सही सलीका
नई दिल्ली/इस्लामिक डेस्क | इस्लाम के पाँच बुनियादी स्तंभों में से ‘नमाज’ (Salah) सबसे अहम इबादत है। यह न केवल अल्लाह की बंदगी का ज़रिया है, बल्कि इंसान के जीवन में अनुशासन, साफ-सफाई और मानसिक शांति का संचार करती है। कुरान और हदीस में नमाज को मोमिन की मेराज और आंखों की ठंडक बताया गया है।
अक्सर कई लोग, विशेषकर नए सीखने वाले या बच्चे, नमाज के सही अरकान (तरीकों) को लेकर असमंजस में रहते हैं। आज हम इस विशेष रिपोर्ट में नमाज पढ़ने का स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step) तरीका विस्तार से जानेंगे।
1. नमाज से पहले की तैयारी (Conditions of Prayer)
नमाज शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है, जिसे ‘शरायत-ए-नमाज’ कहा जाता है:
वज़ू (Wudu): शरीर का पाक होना जरूरी है। बिना वज़ू के नमाज कुबूल नहीं होती।
पाक लिबास: आपके कपड़े साफ-सुथरे होने चाहिए।
जगह की पाकी: जिस जगह आप नमाज पढ़ रहे हैं, वह जगह भी साफ होनी चाहिए।
किबला रुख: मक्का (काबा) की दिशा की ओर मुंह करके खड़े होना।
नियत (Intention): दिल में उस वक्त की नमाज का पक्का इरादा करना।
2. नमाज की मुकम्मल विधि (Step-by-Step Guide)
तहरीमा और कयाम (शुरुआत)
नियत करने के बाद दोनों हाथों को कानों तक उठाएं और “Allahu Akbar” कहते हुए हाथों को नाभि के नीचे (या सीने पर) बाँध लें। इसे ‘तकबीर-ए-तहरीमा’ कहते हैं। अब ‘सना’ (Subhanaka…) पढ़ें, फिर सूरह फातिहा और उसके बाद कुरान की कोई भी सूरत पढ़ें।
रुकू (झुकना)
“Allahu Akbar” कहते हुए झुकें। आपकी कमर सीधी होनी चाहिए और हाथ घुटनों पर। इस स्थिति में कम से कम 3 बार “Subhana Rabbiyal Azeem” (पाक है मेरा परवरदिगार जो बड़ा है) पढ़ें।
कौमा (सीधे खड़े होना)
रुकू से वापस सीधे खड़े होते हुए कहें— “Sami Allahu Liman Hamidah” और फिर कहें “Rabbana Lakal Hamd”।
सजदा (समर्पण की स्थिति)
“Allahu Akbar” कहते हुए जमीन पर इस तरह झुकें कि पहले घुटने, फिर हाथ, फिर नाक और फिर पेशानी (माथा) जमीन पर लगे। सजदे में 3 बार “Subhana Rabbiyal A’la” (पाक है मेरा परवरदिगार जो सबसे ऊंचा है) पढ़ें।
जलसा और दूसरा सजदा
सजदे से उठकर एक पल के लिए सीधे बैठें (इसे जलसा कहते हैं), फिर दोबारा अल्लाहू अकबर कहते हुए दूसरा सजदा करें और वही तस्बीह पढ़ें।
अत्तहियात और दरूद (बैठना)
जब रकात पूरी हो जाए, तो बैठकर ‘अत्तहियात’ पढ़ें। गवाही वाली उंगली (तर्जनी) को ‘अश-हदु अल्ला इलाहा’ पर उठाएं। इसके बाद दरूद-ए-इब्राहिम और दुआ-ए-मासुरा पढ़ें।
सलाम (समाप्ति)
नमाज मुकम्मल करने के लिए पहले अपने दाएं कंधे की तरफ गर्दन घुमाकर कहें— “Assalamu Alaikum wa Rahmatullah”, फिर यही शब्द बाएं कंधे की तरफ देखकर कहें।
3. नमाज के बड़े फायदे (Benefits of Salah)
अनुशासन: पाँच वक्त की पाबंदी इंसान को समय का पाबंद बनाती है।
शारीरिक लाभ: नमाज के दौरान किए जाने वाले आसन (रुकू और सजदा) जोड़ों के दर्द और पाचन तंत्र के लिए व्यायाम का काम करते हैं।
तनाव से मुक्ति: सजदे की स्थिति में मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है, जो डिप्रेशन और तनाव को कम करता है।
निष्कर्ष:
नमाज केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि खुदा से सीधा संवाद है। इसे सुन्नत के मुताबिक और इत्मीनान (सुकून) के साथ पढ़ना ही इसका असली हक है। याद रखें, नमाज में जल्दबाजी करना मना है।