उत्तराखंड में पलायन रोकने की नई पहल, अब हर जिले में बनेगी स्थानीय रणनीति

Advertisements

उत्तराखंड में पलायन रोकने की नई पहल, अब हर जिले में बनेगी स्थानीय रणनीति

 

पहाड़ों से घर छोड़ने वालों की परछाई अब सरकार को साफ दिखने लगी है। कभी आजीविका की तलाश में तो कभी सुविधाओं के अभाव में — उत्तराखंड के गांव लगातार खाली होते जा रहे हैं। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए अब राज्य सरकार ने पलायन पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पहली बार, हर जिले में अलग-अलग हालातों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर ठोस कार्य योजना बनाई जाएगी। शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जून माह के अंत तक अपने जिले की पलायन रोकथाम रणनीति का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंपें।

Advertisements

 

इस निर्देश के तहत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जो जिले की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर योजनाओं का मसौदा तैयार करेगी। यही समिति प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी और ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए अंतिम रूप देगी। समिति में पंचायत, ग्राम्य विकास, कृषि, शिक्षा, पर्यटन और आजीविका मिशन से जुड़े विभागों के अधिकारी भी शामिल रहेंगे ताकि एक समन्वित और व्यावहारिक कार्य योजना तैयार हो सके।

 

राज्य सरकार की मंशा है कि पलायन के पीछे छिपे स्थानीय कारणों की स्पष्ट पहचान की जाए और फिर उनका स्थायी समाधान खोजा जाए। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, बेरोज़गारी, सड़क और यातायात की दिक्कतों को योजना के केंद्र में रखा जाएगा। सरकार चाहती है कि योजनाएं केवल कागज़ों में सीमित न रहें बल्कि ज़मीन पर असर दिखाएं।

 

योजना में यह भी कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में पहले से बागवानी, दुग्ध उत्पादन, होमस्टे, जैविक खेती या पर्यटन की संभावनाएं हैं, वहां इन्हें और बढ़ावा दिया जाएगा। युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोज़गार से जोड़ने के लिए स्टार्टअप योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और ग्राम पंचायतों के माध्यम से निगरानी रखी जाएगी।

 

शासन स्तर पर यह माना जा रहा है कि अगर हर जिले की रणनीति ज़मीनी सच्चाई से जुड़ी होगी, तो पलायन की रफ्तार को रोका जा सकता है। यह प्रयास केवल आंकड़ों को सुधारने के लिए नहीं बल्कि पहाड़ों की आत्मा को बचाए रखने के लिए किया जा रहा है। गांवों में रौनक लौटे, खेतों में हल चले और बच्चे अपने घरों में पढ़ें – यही इस पहल का असली उद्देश्य है।

 

 

Advertisements
THE GREAT NEWS

THE GREAT NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *