सेहत और रूहानियत का संगम है ‘रोजा’, जानें विज्ञान क्या कहता है इसके फायदों पर

Advertisements

सेहत और रूहानियत का संगम है ‘रोजा’, जानें विज्ञान क्या कहता है इसके फायदों पर

नई दिल्ली | डिजिटल डेस्क रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही दुनिया भर में करोड़ों लोग रोजा रखना शुरू कर देते हैं। अमूमन रोजे को केवल एक धार्मिक रस्म के तौर पर देखा जाता है, लेकिन आधुनिक विज्ञान और मेडिकल रिसर्च ने यह साबित कर दिया है कि ‘रोजा’ (Intermittent Fasting का एक रूप) मानव शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

​आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक भूखा-प्यासा रहने से हमारे शरीर के भीतर क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं।

1. शरीर की ‘ऑटोफैगी’ प्रक्रिया: पुरानी कोशिकाओं की मरम्मत

​वैज्ञानिकों के अनुसार, जब शरीर 12 घंटे से अधिक समय तक भूखा रहता है, तो शरीर में ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy) नामक प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें कोशिकाएं खुद की सफाई करना शुरू कर देती हैं। शरीर पुरानी और खराब कोशिकाओं को हटाकर नई और स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण करता है। इस खोज के लिए साल 2016 में जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी को नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है।

Advertisements

2. दिल की सेहत और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण

​रोजा रखने से रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। शोध बताते हैं कि रोजे के दौरान शरीर में ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ (LDL) का स्तर कम होता है और ‘गुड कोलेस्ट्रॉल’ (HDL) में सुधार होता है। इससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा कम हो जाता है और दिल की सेहत बेहतर रहती है।

3. ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ में सुधार और शुगर कंट्रोल

​आज के दौर में टाइप-2 डायबिटीज एक बड़ी समस्या है। रोजा रखने से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है। जब हम कुछ घंटों तक कुछ नहीं खाते, तो ब्लड शुगर लेवल गिरता है और पैंक्रियाज को आराम मिलता है। इससे शरीर शुगर को बेहतर तरीके से प्रोसेस कर पाता है।

4. मस्तिष्क की कार्यक्षमता और मानसिक स्पष्टता

​रोजा सिर्फ पेट के लिए नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। उपवास के दौरान शरीर में BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नाम के प्रोटीन का उत्पादन बढ़ता है। यह प्रोटीन मस्तिष्क की स्टेम कोशिकाओं को नई नसों में बदलने में मदद करता है, जिससे याददाश्त तेज होती है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।

मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलू

​शारीरिक लाभ के अलावा, रोजा रखने के कुछ गहरे मनोवैज्ञानिक फायदे भी हैं:

  • अनुशासन (Discipline): समय पर उठना और समय पर खाना इंसान के जीवन में अनुशासन लाता है।
  • बुरी आदतों से छुटकारा: सिगरेट, कैफीन या ज्यादा मीठा खाने जैसी आदतों को छोड़ने का यह सबसे अच्छा समय होता है।
  • सहानुभूति (Empathy): भूख का अहसास इंसान को दूसरों की मदद करने और समाज के प्रति दयालु बनने के लिए प्रेरित करता है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे रखें खुद को हाइड्रेटेड?

​विशेषज्ञों का कहना है कि रोजे के पूरे फायदे तभी मिलते हैं जब इफ्तार और सहरी संतुलित हो।

  1. इफ्तार में खजूर: खजूर में प्राकृतिक शुगर और फाइबर होता है जो तुरंत ऊर्जा देता है।
  2. पानी का सही चयन: इफ्तार के बाद एक साथ बहुत सारा पानी पीने के बजाय, धीरे-धीरे घूँट-घूँट कर पानी पिएं।
  3. तले-भुने से परहेज: ज्यादा तेल और मसाले वाला खाना एसिडिटी पैदा कर सकता है, इसलिए फलों और ताजी सब्जियों को प्राथमिकता दें।

निष्कर्ष: रोजा केवल आध्यात्मिक शुद्धि का ही नहीं, बल्कि शारीरिक कायाकल्प (Rejuvenation) का भी एक सशक्त माध्यम है। यदि इसे सही तरीके और सही खान-पान के साथ रखा जाए, तो यह लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की नींव रख सकता है।

Advertisements
THE GREAT NEWS

THE GREAT NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *