कानून की कसौटी पर ‘अन्नदाता’: हक की लड़ाई या नियमों की अनदेखी?
अज़हर मलिक
काशीपुर। सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाएं और यातायात का बिगड़ता स्वरूप आज एक बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या कानून की परिभाषा किसी विशेष वर्ग या संगठन के लिए बदल जानी चाहिए? काशीपुर की सड़कों पर आए दिन यह दृश्य आम हो गया है जहाँ किसान यूनियन के नाम पर यातायात नियमों और सरकारी प्रक्रियाओं को चुनौती दी जा रही है।
एक तरफ जहाँ आम नागरिक हेलमेट न पहनने या ओवरलोडिंग पर भारी जुर्माने भरता है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कमर्शियल वाहनों की तरह इस्तेमाल कर सामग्री ढोना और कार्रवाई होने पर हंगामा करना, व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।
हैरानी की बात यह है कि कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग सड़कों पर व्यावसायिक परिवहन के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। जब प्रशासन इन ‘ओवरहाइट’ और असुरक्षित वाहनों पर परिवहन अधिनियम (RTO Rules) के तहत कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो किसान संगठन एकजुट होकर इसे किसानों का उत्पीड़न करार देते हैं। इतना ही नहीं, टोल टैक्स के मुद्दे पर भी यूनियन के नाम पर अक्सर टकराव की स्थिति पैदा की जाती है। यदि देश का हर संगठन इसी तरह ‘यूनियन’ की आड़ में नियमों से बचने लगेगा, तो क्या सड़कों पर अनुशासन कायम रह पाएगा?
तुलना की जाए तो समाज का सबसे मेहनतकश ‘मजदूर वर्ग’ भी कानून के दायरे में आता है। यदि एक मजदूर बिना हेलमेट या ट्रिपल राइडिंग करते पकड़ा जाता है, तो उसे कोई रियायत नहीं मिलती। बैंक लोन पर वाहन लेकर ईमानदारी से टैक्स भरने वाले वाहन स्वामी भी नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में प्रश्न यह है कि क्या ‘अन्नदाता’ होने का सम्मान नियमों को तोड़ने का लाइसेंस दे देता है? कानून की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं और यातायात नियम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सड़कों पर होने वाली मौतों को रोकने के लिए बनाए गए हैं।
समय आ गया है कि संगठनों को आत्ममंथन करना चाहिए। किसी भी वर्ग को कानून से ऊपर होने की छूट देना न केवल अन्य नागरिकों के साथ अन्याय है, बल्कि यह अराजकता को भी बढ़ावा देता है। प्रशासन को भी चाहिए कि वह बिना किसी दबाव के निष्पक्षता से कानून का पालन कराए, ताकि काशीपुर की सड़कें सभी के लिए सुरक्षित हो सकें। आखिर नियम सुरक्षा के लिए हैं, किसी विशेष वर्ग की मनमर्जी के लिए नहीं।