खाकी’ के आगे नतमस्तक हुआ भगोड़ा ‘लाला’, अपराधी के बचाव में उतरे माननीय के खुले सुर!

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खाकी’ के आगे नतमस्तक हुआ भगोड़ा ‘लाला’, अपराधी के बचाव में उतरे माननीय के खुले सुर!

 

अज़हर मलिक 

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काशीपुर : कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत आज काशीपुर पुलिस ने चरितार्थ कर दिखाई है। महीनों से पुलिस को छका रहे और खुद को कानून से ऊपर समझने वाले शातिर अभियुक्त अनूप अग्रवाल उर्फ लाला को आखिरकार थाने की चौखट तक आना ही पड़ा। लेकिन इस पूरी कार्रवाई में सबसे हैरान करने वाला पहलू रहा गदरपुर विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडे का थाने पहुंचना, जो एक बार फिर अपनी ही सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते नजर आए।

 

 

 

काशीपुर सीओ ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि अनूप अग्रवाल कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि 7 संगीन मुकदमों का आरोपी है। धोखाधड़ी (420), गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी (504/506) जैसे मामलों में यह ‘सफेदपोश’ लंबे समय से फरार चल रहा था।

पुलिस के बढ़ते दबाव और कुर्की की आहट ने इस भगोड़े को माननीय न्यायालय की शरण लेने पर मजबूर कर दिया। पुलिस की सख्ती का ही नतीजा है कि आज सभी विवेचकों ने इस शातिर अभियुक्त से गहनता और कड़ाई से पूछताछ की। पुलिस का साफ संदेश है— “अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून की जंजीरों से नहीं बच सकता।”

 

 

 

‘माननीय’ का दांव: सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर प्रहार?

 

एक तरफ सूबे की सरकार अपराध मुक्त उत्तराखंड का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के कद्दावर विधायक अरविंद पांडे एक ‘वॉन्टेड’ अपराधी को “भाजपा कार्यकर्ता” और “सम्मानित व्यापारी” का सर्टिफिकेट बांट रहे हैं। विधायक पांडे का थाने पहुंचकर अभियुक्त के बगल में खड़े होना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

 

जानकारों का कहना है कि: विधायक का यह कदम सीधे तौर पर पुलिस के मनोबल को प्रभावित करने की कोशिश है। लगातार अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखे तेवर दिखाने वाले पांडे ने एक बार फिर अपराधी का पक्ष लेकर अपनी मंशा साफ कर दी है। क्या एक विधायक का कर्तव्य अपराधी को संरक्षण देना है या पुलिस को जांच में स्वतंत्र रूप से काम करने देना?

 

 

 

 

 

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