खाकी का ‘ऑपरेशन क्लीन’: सन्नाटे को चीरती नीली बत्तियाँ और नशे के सौदागर का अंत
हवाओं में घुला जहर जब रगों में उतरने लगे, तो समाज की नींव खोखली होने लगती है, लेकिन जब कानून के रखवाले अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो अंधेरे के ये सौदागर खुद सलाखों के पीछे रोशनी तलाशते नजर आते हैं। देवभूमि की शांत फिजाओं में नशे की खेप उतारने की कोशिश कर रहे एक शातिर दिमाग को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसकी हर हरकत पर ‘खाकी’ का पहरा पहले से ही सख्त हो चुका है।
कुछ ऐसा ही मंजर काशीपुर की गलियों में तब देखने को मिला जब एक नशा तस्कर अपनी काली कमाई और अवैध खेप के साथ सुरक्षित निकलने की फिराक में था, मगर ऊधमसिंहनगर पुलिस के बिछाए जाल ने उसके सारे मंसूबों को पल भर में धुआं कर दिया।
एसएसपी ऊधमसिंहनगर, अजय गणपति की पैनी नजर और उनके कुशल रणनीतिक निर्देशन का ही नतीजा है कि जिले में नशे के सिंडिकेट की कमर टूटने लगी है। पुलिस की इस मुहिम के तहत कोतवाली काशीपुर की टीम ने एक ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया, जिसने तस्करों के गिरोह में खलबली मचा दी है। मुखबिर की सटीक सूचना और पुलिस की मुस्तैदी के चलते घेराबंदी कर एक नशा तस्कर को उस वक्त धर दबोचा गया, जब वह नशे की बड़ी खेप को ठिकाने लगाने की जुगत में था। जांबाज पुलिस टीम ने तलाशी के दौरान अभियुक्त के कब्जे से कुल 02 किलो 20 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया, जो बाजार में युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने के लिए काफी था।
कार्यवाही यहीं नहीं रुकी, बल्कि पुलिस ने तस्कर के पास से नशा तस्करी के काले कारोबार से कमाई गई 5150 रुपये की नकदी भी बरामद की है, जो इस बात का सबूत है कि यह सौदागर लंबे समय से जहर बेचकर अपनी जेबें गर्म कर रहा था। गिरफ्तार अभियुक्त के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्यवाही करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। एसएसपी अजय गणपति के नेतृत्व में जारी इस ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान ने साफ कर दिया है कि ऊधमसिंहनगर की सरजमीं पर नशे के कारोबारियों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। पुलिस की इस सफल कार्यवाही ने न केवल एक अपराधी को सलाखों के पीछे भेजा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया है कि कानून के हाथ उन लोगों तक पहुंचने में देर नहीं लगाते जो समाज की नसों में जहर घोलने का काम करते हैं।