खाकी का ‘सत्यापन’ चक्रव्यूह: जब किस्मत के खेल पर भारी पड़ी पुलिस की पैनी नजर
अज़हर मलिक
शहर की शांत गलियों में जब लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मशगूल थे, तब कुछ बंद कमरों के भीतर अंकों का एक ऐसा मायाजाल बुना जा रहा था जिसकी भनक पड़ोसियों तक को नहीं थी। हार-जीत के इस गुप्त खेल में दांव पर सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि कानून की मर्यादा भी लगी थी।
अंधेरे के इन खिलाड़ियों को गुमान था कि उनकी ‘चाल’ अभेद्य है, लेकिन वे इस बात से बेखबर थे कि खाकी के रडार पर उनकी हर हरकत पहले ही दर्ज हो चुकी है। जब तक सट्टे की मेज पर अगला नंबर खुलता, उससे पहले ही पुलिस की दस्तक ने पूरे खेल का रुख ही पलट दिया और सन्नाटे को चीरते हुए कानून के जूतों की धमक ने उन शातिर चेहरों की नींद उड़ा दी जो किस्मत के नाम पर समाज की रगों में जहर घोल रहे थे।
एसएसपी अजय गणपति के कड़े रुख और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का असर अब काशीपुर की सड़कों पर साफ नजर आने लगा है, जहां अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे धरपकड़ अभियान ने सट्टा माफियाओं की कमर तोड़ दी है। इसी कड़ी में पुलिस द्वारा चलाए गए सघन सत्यापन अभियान ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार शातिर सटोरियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पुलिस टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना और तकनीकी सर्विलांस की मदद से छापेमारी कर इन आरोपियों को उस वक्त दबोचा जब वे बड़े पैमाने पर सट्टे की गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
मौके से पुलिस ने न केवल सट्टे में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए, बल्कि 33,690 रुपए की नकदी भी जब्त की है, जो अवैध रूप से दांव पर लगाई गई थी। पुलिस की इस त्वरित और पेशेवर कार्रवाई ने क्षेत्र के असामाजिक तत्वों में हड़कंप मचा दिया है, वहीं पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अपराध के किसी भी स्वरूप को फलने-फूलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।