काशीपुर: गुलदार की दस्तक से दहशत, लेकिन क्या वो वाकई ‘आदमखोर’ है? सोशल मीडिया की अफवाहों से बचें

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काशीपुर: गुलदार की दस्तक से दहशत, लेकिन क्या वो वाकई ‘आदमखोर’ है? सोशल मीडिया की अफवाहों से बचें

अज़हर मलिक 

काशीपुर। उत्तराखंड के तराई इलाकों में वन्यजीवों और मानवों के बीच संघर्ष की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। ताजा मामला काशीपुर का है, जहां पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण और बाहरी इलाकों में गुलदार की सक्रियता देखी जा रही है। गुलदार द्वारा पालतू जानवरों, खासकर कुत्तों को निशाना बनाए जाने से ग्रामीणों में भारी दहशत है। लेकिन इस डर के बीच ‘अफवाहों का बाजार’ अधिक गर्म है।

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कुत्तों को बना रहा निवाला, लेकिन आदमखोर नहीं!

काशीपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार ने कई पालतू जानवरों पर हमला करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्ते गुलदार का सबसे आसान और पसंदीदा शिकार होते हैं, क्योंकि वे अक्सर आबादी के बाहर अकेले मिल जाते हैं। गुलदार का रिहायशी इलाकों के करीब आना उसके शिकार चक्र (Hunting Routine) का हिस्सा है, न कि इंसानों पर हमले की सोची-समझी साजिश।

सोशल मीडिया पर ‘आदमखोर’ की अफवाह से बढ़ी दहशत

क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी जितनी डरावनी है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप पर गुलदार को ‘आदमखोर’ बताकर वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जिससे आम जनता में भारी खौफ पैदा हो गया है।

अधिकारियों ने अफवाहों को नकारा:

जिम्मेदार अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर के आसपास गुलदार की दस्तक सच है और उसे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और रेस्क्यू के प्रयास जारी हैं। लेकिन, गुलदार के आदमखोर होने की बात पूरी तरह निराधार है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें।

विशेष जानकारी: कब ‘आदमखोर’ बनता है गुलदार?

आम जनता को यह समझना जरूरी है कि हर गुलदार आदमखोर नहीं होता। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गुलदार के आदमखोर बनने की कुछ विशेष परिस्थितियां होती हैं:

बीमारी या चोट: जब गुलदार बूढ़ा हो जाता है या उसके दांत और पंजे चोटिल हो जाते हैं, तो वह अपने प्राकृतिक शिकार (हिरण, जंगली सूअर आदि) को पकड़ने में असमर्थ हो जाता है। तब वह आसान शिकार के रूप में इंसानों की तरफ मुड़ता है।

परिस्थितिजन्य हमला: कई बार अचानक इंसान के सामने आ जाने पर बचाव में गुलदार हमला करता है, जिसे लोग आदमखोर होने का नाम दे देते हैं।

आदमखोर की स्थिति: यदि कोई गुलदार बिना उकसावे के बार-बार इंसानों पर हमला करे और उनका मांस खाए, तभी उसे आधिकारिक तौर पर ‘आदमखोर’ घोषित किया जाता है। काशीपुर में अभी ऐसी कोई स्थिति नहीं है।

 

गुलदार फिलहाल अपने प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार छोटे जानवरों का शिकार कर रहा है। ऐसे में डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है:

शाम के बाद अकेले अंधेरे रास्तों पर न निकलें।

घरों के आसपास पर्याप्त रोशनी रखें।

पालतू जानवरों को सुरक्षित बाड़ों में रखें।

सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट वीडियो को शेयर कर डर न फैलाएं।

वन विभाग का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही गुलदार को रेस्क्यू कर लिया जाएगा।

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