मालधनचौड़ में गुलदार का आतंक: ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मैदान में उतरे जनप्रतिनिधि, बसंती आर्य और महेन्द्र आर्य ने झाड़ियों की कराई गई सफाई।

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मालधनचौड़ में गुलदार का आतंक: ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मैदान में उतरे जनप्रतिनिधि, बसंती आर्य और महेन्द्र आर्य ने झाड़ियों की कराई गई सफाई।

               सलीम अहमद साहिल 

 

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रामनगर: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। रामनगर क्षेत्र के मालधनचौड़ में गुलदार की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। आए दिन उत्तराखंड के कोने कोने गुलदार के हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे मालधनचौड़ क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

मालधनचौड़ के आबादी वाले इलाकों में गुलदार की लगातार दस्तक देखी जा रही है। अब तक कई पालतू पशु और कुत्ते गुलदार का शिकार बन चुके हैं। खासकर बस अड्डे के आसपास घनी झाड़ियों में गुलदार की मौजूदगी से ग्रामीणों को अपनी जान का खतरा बना हुआ था। बावजूद इसके, जिम्मेदार विभागों की ओर से समय रहते ठोस कार्रवाई न होने पर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

 

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पूर्व में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास झाड़ियों की कटाई कराई जाए, ताकि हिंसक वन्यजीवों के हमलों को रोका जा सके। लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों के पालन में लापरवाही सामने आ रही है।

ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जनप्रतिनिधि स्वयं आगे आए। मालधनचौड़ कि वर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख रामनगर बसंती आर्या तथा समाजसेवी महेंद्र आर्य ने पहल करते हुए बस अड्डे के समीप आरडब्ल्यूडी मार्ग पर खड़ी घनी झाड़ियों की जेसीबी मशीन से सफाई करवाई। इस कदम से गुलदार के छिपने की संभावनाएं कम हुई हैं और लोगों ने राहत की सांस ली है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बस अड्डे और आसपास के क्षेत्र में लगातार गुलदार देखा जाता है। जिससे रोजमर्रा के आवागमन में भी डर बना रहता था। झाड़ियों की सफाई के बाद अब स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

ग्रामीणों ने इस पहल के लिए समाजसेवी महेंद्र आर्य और पूर्व ब्लॉक प्रमुख बसंती आर्या का आभार जताया। लोगों का कहना है कि दोनों जनप्रतिनिधि हमेशा जनता की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हैं और अपने स्तर से समाधान के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं। उनका यह कदम जनहित और जनसुरक्षा के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

फिलहाल ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित गश्त, निगरानी और स्थायी समाधान की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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