नैनीताल में स्टोन क्रशरों का ‘ब्लैक गेम’: डमी खातों के जरिए GST को करोड़ों का चूना, क्या सो रहा है महकमा?
अज़हर मलिक
नैनीताल : जनपद में स्टोन क्रशर व्यवसाय इन दिनों विकास के नाम पर विनाशकारी ‘वित्तीय सेंधमारी’ का केंद्र बन गया है। सफेद रेत और बजरी के काले कारोबार में टैक्स चोरी का ऐसा मायाजाल बुना गया है, जिसमें सरकारी राजस्व तो डूब ही रहा है, साथ ही GST और सेल टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, क्रशर स्वामियों ने कानून की नजरों से बचने के लिए एक नया और सुरक्षित रास्ता निकाल लिया है। क्रशरों ने कई ‘प्राइवेट’ लोगों के नाम पर डमी खाते खुलवा रखे हैं। इन खाताधारकों को प्रति कुंतल ₹1 से ₹2 का लालच देकर उनके खातों का इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए किया जा रहा है। वाहन स्वामी और सप्लायर सीधे क्रशर के खाते में पैसा जमा न करके, इन ‘बिचौलियों’ के खातों में रकम ट्रांसफर करते हैं। इस तरह मुख्य क्रशर स्वामी का बैंक रिकॉर्ड पूरी तरह साफ बना रहता है और असली हिसाब-किताब पर्दे के पीछे ‘कच्चे रजिस्टर’ में दर्ज होता है।
रेट का ‘रॉकेट’ और कागजों की हेराफेरी
हैरानी की बात यह है कि बाजार में रेता-बजरी की वास्तविक कीमतें ₹60 से ₹80 प्रति कुंतल के बीच घूम रही हैं, जबकि विभाग को दिखाए जाने वाले बिलों में इसे महज ₹30 से ₹35 के आसपास दर्ज किया जा रहा है। यह ‘अंडर-बिलिंग’ का खेल इतने बड़े स्तर पर है कि सरकार को मिलने वाला GST और रॉयल्टी का हिस्सा आधा भी नहीं पहुंच पा रहा है। रोजाना रेटों में उतार-चढ़ाव दिखाकर सप्लायरों को भ्रमित किया जाता है और मनमानी वसूली की जाती है।
क्या GST और सेल टैक्स विभाग ने मूंद रखी हैं आंखें?
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे वित्तीय हेरफेर के बावजूद नैनीताल के सेल टैक्स और GST अधिकारियों की खामोशी संदेह पैदा करती है। सवाल उठता है कि:
क्या विभाग के पास इन क्रशरों के वास्तविक स्टॉक और बेचे गए माल का मिलान करने का समय नहीं है?
क्या उन डमी बैंक खातों की जांच की जाएगी, जिनमें करोड़ों का संदिग्ध लेनदेन हो रहा है?
क्या अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह ‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ चलाई जा रही है?
यदि समय रहते इन ‘बेनामी ट्रांजेक्शन’ और रेट के खेल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व में भारी गिरावट जारी रहेगी। यह मामला सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और राजस्व की डकैती का है, जिसमें तुरंत छापेमारी और फॉरेंसिक ऑडिट की आवश्यकता है।



