दहशत का ‘डिजिटल’ वार: जब नैनीताल की वादियों में गूँजी तबाही की आहट!
सुकून और शांति की चादर ओढ़े सरोवर नगरी नैनीताल की फिजाओं में उस वक्त बारूदी गंध का खौफ तैरने लगा, जब एक गुमनाम ईमेल ने पूरे सिस्टम की नींद उड़ा दी। नीली झील के किनारे बसी इस नगरी में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक सोशल मीडिया पर उठी एक चिंगारी ने ऐसी आग पकड़ी कि आम जनमानस से लेकर शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि नैनीताल के न्याय के मंदिर को लेकर कोई ऐसी हिमाकत कर सकता है, जो पूरे शहर को दहलाने का दावा करे। इस डिजिटल धमकी ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि चंद मिनटों के भीतर नैनीताल जिला न्यायालय को एक छावनी में तब्दील कर दिया।
घटनाक्रम की शुरुआत एक सनसनीखेज ईमेल से हुई, जिसमें दावा किया गया कि जिला न्यायालय परिसर में आरडीएक्स (RDX) फिट कर दिया गया है और इसे जल्द ही बम से उड़ा दिया जाएगा। जैसे ही यह खबर पुलिस के गलियारों तक पहुंची, आनन-फानन में एसपी डॉ. जगदीश चंद्रा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाल लिया। देखते ही देखते कोर्ट रूम, जजों के चैंबर और वकीलों के ठिकानों को खाली करा लिया गया। न्याय की कुर्सी पर बैठे न्यायमूर्ति से लेकर कलम चलाने वाले कर्मचारी तक, सब अपनी सुरक्षा के लिए सुरक्षित ठिकानों की ओर दौड़ पड़े। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को चारों ओर से घेरकर सघन तलाशी अभियान छेड़ दिया है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसमान से ड्रोन के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। पार्किंग स्थलों से लेकर कोर्ट के हर गुप्त कोने की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। एसपी डॉ. जगदीश चंद्रा ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर यकीन न करें और संयम बनाए रखें। फिलहाल, पूरा नैनीताल हाई अलर्ट पर है और पुलिस उस ‘डिजिटल हमलावर’ की तलाश में जुट गई है जिसने इस शांत नगरी की शांति भंग करने की कोशिश की है। यह महज एक शरारत है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा, इसकी जांच अब सुरक्षा एजेंसियों की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।