वन्यजीव अपराधों पर लगाम कसने को वन विभाग और WCCB ने मिलाए हाथ, दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आगाज़
मुकेश कुमार
हल्द्वानी स्थित एफटीआई (FTI) के सभागार में उत्तराखंड वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के संयुक्त तत्वावधान में वन्यजीव अपराध नियंत्रण विषय पर दो दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
मुख्य वन संरक्षक डॉ. साकेत बडोला के निर्देशन और तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन विशेषज्ञों ने वन्यजीव तस्करी को रोकने की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान उत्तरी क्षेत्र के क्षेत्रीय उप निदेशक विष्णु (IFS) ने वन्यजीव अपराधों की वर्तमान प्रवृत्तियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को अनिवार्य बताया। इस दौरान अवैध वन्यजीव व्यापार में शामिल प्रजातियों की पहचान और फॉरेंसिक तकनीकों के उपयोग पर वन्यजीव संस्थान भारत के विशेषज्ञ सी. पी. शर्मा ने अधिकारियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका के प्रति प्रशिक्षित किया।
प्रशिक्षण के पहले चरण में कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए अधिवक्ता सुरेश यादव ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत विवेचना प्रक्रिया, अभियोजन और केस डॉक्यूमेंटेशन के व्यावहारिक गुर सिखाए। कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से एसडीओ अनिल जोशी और सावित्री गिरी सहित कुमाऊँ क्षेत्र के विभिन्न प्रभागों से आए एसडीओ और वन क्षेत्राधिकारियों ने सक्रिय रूप से अपनी सहभागिता दर्ज की। इस गहन प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मैदानी स्तर पर तैनात अधिकारियों की कानूनी समझ और तकनीकी दक्षता को इतना सुदृढ़ करना है कि वन्यजीव अपराधों की रोकथाम प्रभावी ढंग से की जा सके। पहले दिन प्रतिभागियों को तलाशी, जब्ती, गिरफ्तारी और केस डायरी तैयार करने के साथ-साथ मॉक क्राइम सीन का अभ्यास भी कराया गया। 13 जनवरी को कार्यक्रम के दूसरे दिन मूट कोर्ट और केस मूल्यांकन के जरिए अधिकारियों को कानूनी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाएगा।