लालकुआँ में पर्यावरण का ‘नरसंहार’: सेंचुरी पेपर मिल की जहरीली स्लज से वन भूमि हो रही तबाह, वन विभाग की चुप्पी ने खड़े किए गंभीर सवाल
मुकेश कुमार
लालकुआँ : एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, तो दूसरी ओर लालकुआँ में जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे वन भूमि को जहरीले रसायनों से पाटा जा रहा है।
ताजा मामला तराई केन्द्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर के टांडा रेंज का है, जहाँ ट्रांसपोर्ट नगर स्थित खाली पड़ी वन भूमि पर सेंचुरी पेपर मिल की केमिकल युक्त ‘जहरीली स्लज’ (कचरा) खुलेआम डाली जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि नेशनल हाईवे 109 के किनारे लालकुआँ शहर से महज 100 मीटर की दूरी पर मौत का यह सामान फैलाया जा रहा है, लेकिन टांडा रेंज के जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं।
आरोप है कि यह जहरीली स्लज न केवल पर्यावरण और हरी-भरी वन भूमि को नष्ट कर रही है, बल्कि अवैध अतिक्रमण की नीव रखने के लिए यहाँ जमीन का भरान किया जा रहा है।
इस ‘केमिकल माफिया’ की करतूतों से स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। विशेषज्ञों और पर्यावरण मित्रों का कहना है कि सेंचुरी पेपर मिल से निकलने वाली यह स्लज इतनी घातक है कि इससे आसपास की मिट्टी की उर्वरता हमेशा के लिए खत्म हो रही है। यही नहीं, स्थानीय निवासियों में दमा, कैंसर और सांस लेने की गंभीर तकलीफें बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
लोगों का कहना है कि यह जहरीला कचरा हवा और पानी के जरिए सीधे इंसानी फेफड़ों तक पहुँच रहा है, जिससे आने वाले समय में यहाँ ‘हेल्थ इमरजेंसी’ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। बावजूद इसके, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हीलाहवाली यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं बड़े रसूखदारों को बचाने के लिए नियमों की बलि चढ़ाई जा रही है। आक्रोशित नागरिकों ने अब प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में मांग की है कि इस अवैध कृत्य को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, अन्यथा क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
