छोई रामनगर घटना का मुख्य आरोपी मदन मोहन जोशी गिरफ्तार, 1 महीने की तलाश के बाद पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण
छोई, रामनगर में 23 अक्टूबर 2025 को हुई भीड़ हिंसा की गंभीर घटना में बड़ा अपडेट सामने आया है, जहाँ मुख्य आरोपी मदन मोहन जोशी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरी घटना तब शुरू हुई थी जब एक डी-फ्रीजर पिकअप वाहन, जिसमें वैध कागजात और लाइसेंस के साथ भैंस का मांस ले जाया जा रहा था, उसे मुख्य आरोपी ने गाय का मांस बताकर अफवाह फैलाते हुए भीड़ को गुमराह कर दिया। उत्तेजित भीड़ ने वाहन के चालक पर जानलेवा हमला किया, चालक को अधमरा कर दिया और वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इसी दौरान कई लोगों ने इस घटना का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण भी किया। सूचना मिलते ही डायल 112 और रामनगर पुलिस मौके पर पहुँची, चालक को भीड़ से छुड़ाकर सुरक्षित निकाला गया और तत्काल प्राथमिक उपचार कराया गया। पशु चिकित्सक की प्रारंभिक रिपोर्ट में पुष्टि की गई कि वाहन में भैंस का मांस ही था, जिसके बाद चालक की पत्नी की तहरीर पर FIR संख्या 382/25 में मदन मोहन जोशी सहित कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
इस संवेदनशील मामले को माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल ने स्वयं संज्ञान में लिया, और उसके निर्देश पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा एक विशेष SIT का गठन किया गया, जिसने तकनीकी विश्लेषण, मैनुअल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया वीडियो की जांच कर कुल 16 आरोपियों को चिह्नित किया। इनमें से 14 को पुलिस ने गिरफ्तार किया जबकि 2 ने अदालत में आत्मसमर्पण किया। मुख्य आरोपी मदन मोहन जोशी के खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट, धारा 84 BNSS की कार्यवाही और धारा 85 BNSS के तहत कुर्की वारण्ट की कार्रवाई भी शुरू की गई थी। आरोपी लगातार फरार चल रहा था और उसकी अग्रिम जमानत व अन्य याचिकाएँ भी उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थीं।
किसी भी तरह की राहत न मिलने और पुलिस दबाव बढ़ने के बाद, मुख्य आरोपी मदन मोहन जोशी ने आज 25 नवंबर 2025 को थाना रामनगर में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे नियमानुसार गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और जेल भेज दिया। उच्च न्यायालय इस पूरे मामले की विवेचना की निगरानी कर रहा है और आगे की पूछताछ व तकनीकी साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया न्यायालय की अनुमति से जारी रहेगी। रामनगर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई मोब लिंचिंग थी, जिसे सोशल मीडिया पर लाइव कर भीड़ को भड़काने की कोशिश की गई। विवेचना आगे भी जारी है और पुलिस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।