नैनीताल सेल टैक्स विभाग की ‘मेहरबानी’ या गहरी नींद? जनपद में फल-फूल रहा करोड़ों की टैक्स चोरी का सिंडिकेट

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नैनीताल सेल टैक्स विभाग की ‘मेहरबानी’ या गहरी नींद? जनपद में फल-फूल रहा करोड़ों की टैक्स चोरी का सिंडिकेट

अज़हर मलिक

हल्द्वानी/नैनीताल: जनपद नैनीताल में इन दिनों राजस्व को चूना लगाने वाले माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जिस विभाग पर कर चोरी रोकने का जिम्मा है, वही सेल टैक्स विभाग (वाणिज्य कर विभाग) कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। स्टोन क्रशर से लेकर ईंटों के व्यापार तक, टैक्स चोरी का खेल ‘सेटिंग-गेटिंग’ के फॉर्मूले पर सरेआम चल रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने या तो इन माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं या फिर उनकी ‘छत्रछाया’ में ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।

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उत्तर प्रदेश से आने वाली ईंटों के ट्रकों में धांधली का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। सूत्रों की मानें तो यूपी से आने वाले वाहनों में ईंटें तो ‘फर्स्ट क्वालिटी’ की होती हैं, लेकिन कागजों में उन्हें ‘थर्ड क्वालिटी’ का दिखाकर टैक्स की भारी चोरी की जा रही है। इतना ही नहीं, ट्रक में लदी ईंटों की वास्तविक संख्या बिल में दिखाई गई संख्या से कहीं ज्यादा होती है। जो माल अनिवार्य रूप से e-Way Bill के दायरे में आना चाहिए, उसे सामान्य बिलों के ‘झोल’ में छिपाकर हल्द्वानी की मार्केट में उतारा जा रहा है। अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस खेल से रोजाना सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

 

 

 

यह पहली बार नहीं है जब विभाग की सुस्ती सामने आई हो। इससे पूर्व भी अनाज ढोने वाले वाहनों के जरिए गुटका, सिगरेट और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की तस्करी के मामले उजागर हुए थे। बावजूद इसके, सेल टैक्स विभाग ने कोई ठोस नाकेबंदी या सख्त कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे रखा। चेकिंग के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है, जबकि मुख्य सड़कों से लेकर चोर रास्तों तक टैक्स चोरी का सामान बेधड़क सप्लाई हो रहा है।

 

 

 

 

व्यापारियों और आम जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि बिना विभागीय ‘शॉर्टकट’ और साठगांठ के इतना बड़ा सिंडिकेट चलना नामुमकिन है। ई-वे बिल की मॉनिटरिंग और सचल दल (Mobile Squad) की सक्रियता दावों तक ही सीमित है। अगर विभाग वास्तव में ईमानदार है, तो अब तक इन स्टोन क्रशरों और ईंट माफियाओं पर नकेल क्यों नहीं कसी गई? सवाल यह भी है कि आखिर कब तक जनता के टैक्स का पैसा इन माफियाओं की जेबों और अधिकारियों की कथित ‘सेटिंग’ की भेंट चढ़ता रहेगा?

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