मानवता की मिसाल बनी रामनगर पुलिस। पढ़िए क्या है पूरी कहानी।
सलीम अहमद साहिल
रामनगर की मित्र पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ कानून की रक्षक नहीं, बल्कि पीड़ितों की सच्ची सहायक और सेवक भी होती है।
ऊधमसिंहनगर जनपद के काशीपुर से एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्चा, जो कक्षा 5 में पढ़ता है, साइकिल चलाते हुए भटककर रामनगर पहुँच गया। मासूम बच्चा अनजान रास्तों पर भटक रहा था, लेकिन गनीमत रही कि उसके साथ कोई अनहोनी नहीं हुई।
जैसे ही बच्चे के भटककर रामनगर पहुँचने की सूचना मिली, रामनगर पुलिस देवदूत बनकर तुरंत मौके पर पहुँची। बच्चे को सुरक्षित कोतवाली लाया गया, उससे पूरी संवेदनशीलता के साथ जानकारी ली गई और बिना देर किए उसके परिजनों से संपर्क किया गया।
अपने बच्चे की तलाश में परेशान परिजन सूचना मिलते ही रामनगर कोतवाली पहुँचे। बच्चे को सकुशल देखकर उनकी आँखों में राहत के आँसू थे। रामनगर पुलिस ने बच्चे को पूरी सुरक्षा और सम्मान के साथ उसके परिजनों के सुपुर्द किया।
यह केवल एक बच्चे को उसके परिवार से मिलाने की घटना नहीं थी, बल्कि यह पुलिस और जनता के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और मानवता की एक सशक्त मिसाल थी। रामनगर पुलिस की यह त्वरित, मानवीय और सराहनीय कार्यवाही उत्तराखंड पुलिस की सकारात्मक कार्यशैली को फिर से प्रमाणित करती है।
सलाम है रामनगर की मित्र पुलिस को— जो वर्दी में सिर्फ कानून नहीं बल्कि इंसानियत भी निभाती है।