आधी रात का वो खौफनाक मंजर और 11 साल का लंबा इंतजार, रामनगर में गूँजी न्याय की दस्तक
सलीम अहमद साहिल
तारीख थी 21 अप्रैल 2025, रात के करीब 10:00 बज रहे थे। गाँव की खामोशी के बीच अचानक कुछ ऐसा घटा जिसने एक परिवार की पूरी दुनिया को दहशत के साये में धकेल दिया। सस्पेंस और डर के उस माहौल में, जब घर की दहलीज सुरक्षित मानी जाती थी, तब कुछ चेहरों ने कानून और इंसानियत दोनों को ठेंगा दिखा दिया। सालों तक यह मामला फाइलों और यादों के बीच दबा रहा, लेकिन कहते हैं कि जुल्म की दास्तां चाहे कितनी भी पुरानी क्यों न हो, सच की गूँज एक दिन बाहर आ ही जाती है। नैनीताल के रामनगर स्थित ग्राम थारी में घटी उस पुरानी खौफनाक वारदात ने आज एक दशक बाद फिर से हलचल पैदा कर दी है।
माननीय न्यायालय के कड़े आदेश के बाद, रामनगर पुलिस ने उस पुरानी रात के गुनाहगारों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए न्याय का बिगुल फूँक दिया है। शिकायतकर्ता करमजीत कौर की उस आपबीती ने आज एफआईआर की शक्ल ली है, जिसमें शमशेर सिंह, करन सिंह और फाजिल्का निवासी राणा सिंह उर्फ गुन्नी पर घर में घुसकर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला करने, गाली-गलौज और महिलाओं के साथ अभद्रता (छेड़छाड़) करने जैसे संगीन आरोप लगे हैं। पुलिस ने बीएनएस की गंभीर धाराओं 115(2)/351(3)/352/333/74/304 के तहत मुकदमा अपराध संख्या 60/2026 पंजीकृत कर लिया है। बरसों पुराने इस जख्म पर कानून की मरहम और पुलिस की सक्रियता ने उन लोगों के मन में फिर से भरोसा जगाया है, जो सालों से इंसाफ की आस लगाए बैठे थे। यह कार्यवाही उन रसूखदारों के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश है कि कानून के हाथ लंबे भी हैं और बेहद सख्त भी।