काशीपुर मंडी में धान खरीदी के नाम पर ‘सफेदपोशों’ का काला खेल, जल्द होगा महाखुलासा!
अज़हर मलिक
काशीपुर की अनाज मंडी इन दिनों किसानों की फसल के वाजिब दाम दिलाने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी तिजोरी में सेंध लगाने वाले गिरोहों की सक्रियता को लेकर चर्चा में है। विश्वस्त सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, मंडी की आड़ में एक ऐसा सुनियोजित ‘धान घोटाला’ फल-फूल रहा है, जिसमें कागजों पर तो किसान नजर आ रहे हैं,
लेकिन असल मलाई बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ से काटी जा रही है। बिना एक इंच जमीन के ‘कागजी जमींदार’ बने इन बिचौलियों ने सिस्टम के रखवालों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा तिलस्म बुना है, जिसने सरकारी नियमों को तमाशबीन बना दिया है।
मंडी के भीतर और बाहर सक्रिय यह सिंडिकेट दूसरे राज्यों और सस्ते दामों पर खरीदे गए धान को ठिकाने लगाने के लिए असली किसानों के हक पर डाका डाल रहा है।
चर्चा है कि मोटा कमीशन और ‘सुविधा शुल्क’ के चक्कर में कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आंखें मूंद ली हैं। हालांकि, इस पूरे सिंडिकेट के कई अहम सुराग और दस्तावेज अब हमारी टीम के रडार पर हैं। हमारा मकसद किसी की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि इस गहरे भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुँचना है। यही कारण है कि हम फिलहाल कुछ नामों और चेहरों को उजागर करने से पहले अपनी ‘इन्वेस्टिगेशन’ को अंतिम रूप दे रहे हैं। हमारी टीम बारीकी से हर उस एंट्री और बैंक ट्रांजेक्शन की स्टडी कर रही है, जो इस घोटाले की कड़ियों को जोड़ती है।
जैसे ही साक्ष्यों का मिलान और तथ्यों की पुष्टि की प्रक्रिया पूरी होती है, इस पूरे खेल का कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक किया जाएगा। कौन-कौन से चेहरे इस लूट में शामिल हैं और किस अधिकारी की कलम से इस फर्जीवाड़े को हरी झंडी मिली, इसकी परत-दर-परत जानकारी जल्द ही सामने होगी। क्योंकि हमारी गहन छानबीन जारी है और इस ‘महाखुलासे’ से मंडी से लेकर मंत्रालय तक हड़कंप मचना तय है।