लालकुआँ की फिजाओं में ‘अलाव’ की तपिश: एक ही दिन में ‘फूंक’ डाली 183 कुंतल लकड़ी? RTI के खुलासे ने उड़ाए होश!

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लालकुआँ की फिजाओं में ‘अलाव’ की तपिश: एक ही दिन में ‘फूंक’ डाली 183 कुंतल लकड़ी? RTI के खुलासे ने उड़ाए होश!

मुकेश कुमार 

लालकुआँ (नैनीताल): पहाड़ों की तलहटी में बसे लालकुआँ की सर्द रातों में अलाव जलाना आम बात है, लेकिन इस बार इन अलावों से उठने वाला धुआं भ्रष्टाचार की गंध दे रहा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निकले एक दस्तावेज़ ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। क्या यह मुमकिन है कि एक छोटे से कस्बे में महज़ 24 घंटे के भीतर 183 कुंतल लकड़ी ‘राख’ हो गई या फिर कागजों पर ही आग जलाकर सरकारी खजाने को सेंध लगाई गई? यह रहस्य अब शहर की हर गली में चर्चा का विषय बन चुका है।

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वार्ड नंबर चार के निवासी समाजसेवी मोहम्मद सरफराज की एक आरटीआई ने उस सिस्टम की परतें उधेड़ दी हैं, जो अब तक अंधेरे में था। वर्ष 2025-26 के निर्माण कार्यों और अलाव व्यवस्था की कुंडली खंगालने पर जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। सरकारी फाइलों में दर्ज तौल पर्ची यह दावा करती है कि नगर पंचायत ने एक ही दिन में 183 कुंतल लकड़ी की थोक खरीद की। स्थानीय लोग हैरान हैं कि आखिर इतनी भारी मात्रा में लकड़ी कहाँ उतारी गई, कहाँ स्टोर की गई और इसे जलाने के लिए किन चौराहों का चयन हुआ? क्योंकि जमीन पर न तो इतने बड़े ढेर दिखे और न ही इतनी भीषण ठंड थी कि एक दिन में क्विंटल के क्विंटल ईंधन स्वाहा हो जाए।

इस कथित ‘कागजी अलाव’ की आंच अब नगर पंचायत के गलियारों तक पहुँच चुकी है। निर्वाचित सभासदों ने भी अपनी ही संस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप लग रहे हैं कि यह कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी अनियमितता हो सकती है। जहां एक ओर जनता इस भारी-भरकम खरीद के भंडारण और वितरण का ब्यौरा मांग रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने एक रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। सवाल अब जिला प्रशासन के पाले में है—क्या 183 कुंतल लकड़ी के इस तिलिस्म की कोई स्वतंत्र जांच होगी, या फिर सिस्टम की यह फाइल भी अलाव की तरह राख में दबा दी जाएगी?

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