खौफ का पीछा और रिसॉर्ट की दीवारें: रामनगर वन विभाग का वो ‘मैराथन’ ऑपरेशन जिसने खनन माफियाओं के होश उड़ा दिए
अज़हर मलिक
रामनगर। सन्नाटे को चीरती हुई सायरनों की गूँज नहीं, बल्कि रणनीतिक ख़ामोशी थी जिसने कालु सिद्ध नदी के पत्थरों को आज दहला दिया। अमूमन शांत दिखने वाले इस तराई बेल्ट में आज जो हुआ, वो किसी फ़िल्मी पटकथा से कम नहीं था। जब तक नदी की लहरों के बीच ‘केकड़ों’ (मिनी लोडर) के इंजन गरजते, उससे पहले ही मौत बनकर वन विभाग की तीन टीमें उनके घेराबड़बंदी कर चुकी थीं। यह कोई साधारण गश्त नहीं थी, बल्कि एक ऐसा जाल था जिसकी बुनावट कई रास्तों से होकर गुजरी थी। जैसे ही टीम की आहट हुई, अवैध खनन के सौदागरों के बीच भगदड़ मच गई। नदी की धारा को चुनौती देते हुए ये मिनी लोडर छोई की तरफ भागे, यह सोचकर कि रास्ता साफ़ है, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि एक टीम पहले से ही ‘प्राइवेट कवर’ में उनकी सांसों का हिसाब रखने के लिए वहां तैनात थी।
खुद को घिरता देख भाग रहे चालकों ने चालाकी दिखाते हुए वाहनों को एक निजी रिसॉर्ट के प्रांगण में खड़ा कर दिया और घने झुरमुटों का फायदा उठाकर रफूचक्कर हो गए। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी के सटीक मार्गदर्शन और उप प्रभागीय वनाधिकारी व क्षेत्राधिकारी रामनगर के नेतृत्व में चली इस घेराबंदी ने अंततः सफलता का परचम लहराया। संयुक्त टीमों ने छापेमारी के दौरान पांच मिनी लोडरों को अपनी गिरफ्त में ले लिया, जिन्हें अब विधिक कार्यवाही की बेड़ियों में जकड़कर रामनगर कार्यशाला की सुरक्षित अभिरक्षा में खड़ा कर दिया गया है। हालांकि, इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच एक मोड़ ऐसा भी आया जिसने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे डाली; बैलपड़ाव QRT टीम की सुपुर्दगी में दिया गया एक ‘केकड़ा’ चालक की ढिठाई के चलते मौके से भाग निकलने में कामयाब रहा। फिलहाल, वन विभाग की इस स्ट्राइक ने अवैध खनन के सिंडिकेट में खलबली मचा दी है और फरार चालकों की तलाश तेज कर दी गई है
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