बच्चों के सपनों को पंख और उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने के साथ ही उत्तराखंड के भविष्य का नेतृत्व: WE भोर की प्रेरणादायक पहल।
सलीम अहमद साहिल
उत्तराखंड की युवा पीढ़ी आज जिस सबसे बड़े संकट से जूझ रही है, वह है नशे का बढ़ता जाल। यह नशा केवल युवाओं की जवानी को ही नहीं निगल रहा, बल्कि उनके माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी को भी कमजोर कर रहा है। नशे की गिरफ्त में फँसे युवा अनजाने में अपने सपनों, अपनी प्रतिभा, अपने कौशल और अपने सुनहरे भविष्य को खुद ही अंधकार में धकेल रहे हैं।
यह नशा सिर्फ जीवन को समाप्त नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों, संघर्षों और विश्वास को भी तोड़ देता है। हालांकि युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन समाज में कुछ ऐसी संस्थाएँ भी हैं, जो निस्वार्थ भाव से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को गढ़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

इन्हीं में से एक संस्था है WE भोर (वी भोर), जो रामनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके मालधनचौड़ में लगातार सकारात्मक बदलाव की अलख जगा रही है। WE भोर संस्था बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए कंप्यूटर शिक्षा, आर्ट, संगीत, कथकली नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण दे रही है। इसके साथ-साथ संस्था बच्चों और युवाओं को यह भी समझा रही है कि पुराने समय और आज के समय में क्या अंतर आया है, बुजुर्गों और गुरुओं को पहले जैसा सम्मान आज क्यों और कैसे कम होता जा रहा है, और अपनी संस्कृति को संजोकर रखना आने वाली पीढ़ी की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए WE भोर संस्था द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका नाम था—
“उत्तराखंड अंतर-पीढ़ी संवाद: युवा-केंद्रित नेतृत्व का निर्माण”।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों और युवाओं के बीच संवाद स्थापित करना और यह समझना था कि दोनों के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि अब समय आ गया है जब माता-पिता को भी यह समझना होगा कि बच्चों की जिस क्षेत्र में रुचि है, उसी क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। बच्चों के सपनों को पंख तभी मिलेंगे, जब उन्हें अपनी पसंद के अनुसार उड़ान भरने की आज़ादी दी जाएगी।
वहीं युवाओं को भी यह समझाया गया कि उनके माता-पिता दिन-रात मेहनत केवल इसलिए करते हैं ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा, अच्छा स्वास्थ्य और एक सुरक्षित भविष्य मिल सके। ऐसे में माता-पिता का सम्मान करना केवल संस्कार नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य भी है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह भी संदेश दिया गया कि वे गलत संगत से दूर रहें और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से खुद को बचाएँ।
इस अंतर-पीढ़ी संवाद कार्यक्रम में बच्चों और अभिभावकों ने खुलकर अपने विचार साझा किए। सभी ने समाज में बढ़ रही कुरीतियों को रोकने और अपने समाज को सुरक्षित, संस्कारित और जागरूक बनाने के लिए मिलकर कदम उठाने का संकल्प लिया।
WE भोर संस्था की इस सराहनीय पहल को ग्रामीणों ने भी खुले दिल से सराहा और संस्था के प्रयासों की प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी संस्थाएँ इसी तरह समाज को दिशा देती रहीं, तो आने वाली पीढ़ी निश्चित रूप से नशे से दूर रहकर एक मजबूत, शिक्षित और संस्कारित समाज का निर्माण करेगी।