खैर तस्करों के काल बने तराई पश्चिमी के जांबाज: आधी रात को गन्ने के खेतों में बिछाया ‘मौत का जाल’, फिल्मी स्टाइल में दबोचा तस्कर
अज़हर मलिक
तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर के प्रभागीय वनाधिकारी और उप प्रभागीय वनाधिकारी महोदया के कुशल निर्देशन तथा वन क्षेत्राधिकारी वन सुरक्षा के साहसिक नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने वन तस्करों के विरुद्ध एक ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है जिसने क्षेत्र के लकड़ी माफियाओं की कमर तोड़ कर रख दी है।
तस्करों को लगता था कि वे अंधेरे और खेतों की ओट में छिपकर जंगल की बेशकीमती लकड़ी पर डाका डाल लेंगे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वन विभाग की टीम के इरादे ‘सिंघम’ जैसे फौलादी हैं। दिनांक 20 जनवरी 2026 की काली रात में जब दुनिया सो रही थी, तब वन सुरक्षा बल की टीम मुखबिर की सटीक सूचना पर जुडका क्षेत्र में मौत को मात देते हुए घात लगाकर बैठ गई थी।
जैसे ही रात के करीब 1:00 बजे सन्नाटे को चीरती हुई तीन बाइकें खैर के गिल्टे उठाने के लिए मौके पर पहुँची, वन विभाग के जांबाज सिपाहियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। खुद को घिरा देख तस्करों के पैरों तले जमीन खिसक गई और वे अपनी बाइकें छोड़कर गन्ने के घने खेतों में भागने लगे। “वन विभाग से बचकर जाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है” इस बात को चरितार्थ करते हुए टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया और खेतों में लंबी दौड़ लगाकर एक मुजरिम को दबोच लिया, जबकि दो अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। इस पूरी कार्रवाई की गूँज जब उच्चाधिकारियों तक पहुँची तो उप प्रभागीय वनाधिकारी महोदया ने तुरंत अतिरिक्त फोर्स मौके पर भेजी, जिसके बाद 09 गिल्टे खैर की लकड़ी और तीनों बाइकों को कब्जे में लेकर राजकीय वाहन के जरिए कार्यशाला वर्कशॉप रामनगर में सुरक्षित पहुँचाया गया।
वन संपदा की रक्षा में अपनी जान की बाजी लगाने वाली इस वीर टीम में अशोक कुमार टम्टा वन क्षेत्राधिकारी वन सुरक्षा बल, अजय कुमार वन आरक्षी, मनमोहन सिंह वन आरक्षी, गंगा सिंह वन आरक्षी और चालक अमीर खान शामिल रहे। इन जांबाज वन कर्मियों की मुस्तैदी ने साबित कर दिया है कि तराई पश्चिमी वन प्रभाग के जंगलों में परिंदा भी उनकी इजाजत के बिना पर नहीं मार सकता। तस्करों के लिए यह कार्रवाई एक खुली चेतावनी है कि अगर वन संपदा की ओर आँख उठाकर भी देखा, तो अंजाम बहुत बुरा होगा।