सम्मान को हर बार इम्तिहान क्यों है: दीवारों पर टंगी सियासत और लालकुआँ में दलित स्वाभिमान की ललकार!
मुकेश कुमार
क्या एक तस्वीर सिर्फ एक चेहरा होती है या फिर वो किसी समाज के वजूद और उसके राजनीतिक रसूख का प्रतीक? लालकुआँ की फिजाओं में सोमवार को यह सवाल उस वक्त शोर बनकर गूंजने लगा जब नगर पंचायत कार्यालय की दीवारें एक खालीपन को लेकर अखाड़ा बन गईं। मामला सिर्फ एक चौखट के फ्रेम का नहीं था, बल्कि उन जज्बातों का था जो सीधे तौर पर एक समाज के मान-सम्मान से जुड़े थे। जब सत्ता की दहलीज पर बैठे अधिकारियों की चुप्पी को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने चुनौती दी, तो लालकुआँ नगर पंचायत का पूरा प्रशासनिक ढांचा हिल उठा। आखिर क्यों एक निवर्तमान चेयरमैन की तस्वीर लगाने के लिए कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतरकर घेराव करना पड़ा और क्या यह महज एक प्रशासनिक देरी है या फिर इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक उपेक्षा?
लालकुआँ नगर पंचायत में सोमवार को उस वक्त भारी गहमागहमी देखने को मिली जब भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अधिशासी अधिकारी ईश्वर सिंह रावत के दफ्तर में डेरा डाल दिया। कार्यकर्ताओं का साफ तौर पर आरोप था कि निवर्तमान चेयरमैन लालचन्द्र सिंह की तस्वीर को नगर पंचायत कार्यालय की दीवारों पर जगह न देना सीधे तौर पर दलित समाज और संविधान की गरिमा का अपमान है। आक्रोश इस कदर था कि नारेबाजी के बीच दफ्तर के भीतर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे एक खास विचारधारा और समाज की अनदेखी करार दिया। कार्यकर्ताओं ने दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि यदि स्वाभिमान की इस लड़ाई में देरी हुई, तो आंदोलन की चिंगारी को पूरे क्षेत्र में फैलने से कोई नहीं रोक पाएगा।
सिर्फ तस्वीर ही नहीं, इस प्रदर्शन के जरिए एक और बड़ी मांग बुलंद की गई। कार्यकर्ताओं ने नगर पंचायत परिसर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम से एक भव्य द्वार के निर्माण की आवाज उठाई और अधिशासी अधिकारी को इस बाबत ज्ञापन सौंपा। आजाद समाज पार्टी के जिला सचिव सुरेश चन्द्र बेरी और अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने दो टूक कहा कि बाबा साहेब का सम्मान किसी भी संस्थान का संवैधानिक कर्तव्य है, जिसे नजरअंदाज करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारी दबाव के बीच अधिशासी अधिकारी ईश्वर सिंह रावत ने आश्वासन दिया कि तस्वीर लगाने की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा और अन्य मांगों पर भी नियमानुसार विचार किया जाएगा। सुरेश चन्द्र बेरी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में खीमचन्द्र आर्य, मो० सुलेमान, फिरोज खान और संतोष आर्य जैसे तमाम दिग्गजों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि लालकुआँ की राजनीति में अब सम्मान की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर आ गई है।